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मंडियों में धान के ढेर, खरीद और उठान ठप होने से किसानों में रोष

Paddy Procurement Crisis Angers Farmers in Punjab : अमृतसर। पंजाब की अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद और पहले से खरीदी गई फसल का उठान धीमा होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अजनाला क्षेत्र की मंडियों में खरीद व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुखजिंदर सिंह सुख औजला ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अजनाला, सुधार, चक सिकंदर और गग्गो माहल सहित सभी मंडियों में खरीद और उठान प्रक्रिया तत्काल तेज करने की मांग की।

खरीद और उठान की धीमी प्रक्रिया के चलते किसानों में सरकार और संबंधित खरीद एजेंसियों के खिलाफ भारी रोष पाया जा रहा है। इसी स्थिति का जायजा लेने के लिए सांसद गुरजीत सिंह औजला के भाई और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुखजिंदर सिंह सुख औजला ने अजनाला क्षेत्र की विभिन्न अनाज मंडियों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अजनाला, सुधार, चक सिकंदर, गग्गो माहल सहित अन्य मंडियों में पहुंचकर किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।

सुख औजला ने बताया कि अजनाला की मुख्य मंडी में कुछ स्थानों पर आंशिक रूप से धान की खरीद हो रही है, लेकिन क्षेत्र की छोटी मंडियों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। सुधार, चक सिकंदर और गग्गो माहल जैसी मंडियों में धान की खरीद नहीं हो पा रही। इसके चलते किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में बैठे हैं और उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी उपज की खरीद कब होगी। उन्होंने कहा कि समस्या केवल सरकारी खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि जिन किसानों की फसल पहले खरीदी जा चुकी है, उसका उठान भी समय पर नहीं किया जा रहा।

इससे मंडियों में जगह की कमी हो रही है और नई फसल लेकर पहुंचने वाले किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुख औजला ने कहा कि धान की खरीद और उठान में देरी का सीधा असर किसानों के अगले कृषि सीजन पर पड़ सकता है। समय पर फसल की खरीद और मंडियों से उठान नहीं होने के कारण किसान अपनी जमीन खाली नहीं करवा पाएंगे। इससे खेतों की तैयारी और अगली फसल की बुवाई में देरी होने की आशंका है। कृषि चक्र प्रभावित होने से किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार और संबंधित खरीद एजेंसियों से मांग की कि अजनाला, सुधार, चक सिकंदर और गग्गो माहल सहित क्षेत्र की सभी मंडियों में धान की सरकारी खरीद तुरंत सुचारू करवाई जाए और पहले से खरीदी गई फसल का उठान युद्धस्तर पर किया जाए, ताकि किसानों को मंडियों में लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जबकि सरकार को खरीद सीजन के दौरान पर्याप्त इंतजाम पहले से करने चाहिए थे।

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