चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पटियाला में फर्जी पुलिस मुठभेड़ का आरोप लगाने वाली एक याचिका के संबंध में पंजाब सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया है।
अदालत ने दोनों पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है तथा अगली सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में निर्धारित की है।
पीड़ित परिवार की ओर से अधिवक्ता नवकिरण सिंह ने यचिका दायर कर आरोप लगाया कि नाभा निवासी जसप्रीत सिंह की 12 मार्च को पटियाला पुलिस ने बाल अपहरण के एक मामले में फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी थी।
परिवार के अनुसार, जसप्रीत सिंह की गोली मारकर हत्या करने से पहले ही वह पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुका था। प्रत्यक्षदर्शियों ने कथित तौर पर दावा किया कि घटनास्थल पर गोलियों की कोई आवाज नहीं थी, जिससे पुलिस के घटनाक्रम पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
अधिवक्ता नवकिरण सिंह ने कहा, “पुलिस ने सिर्फ़ वाहवाही बटोरने के लिए यह फ़र्जी मुठभेड़ की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि तीन गोलियाँ बहुत नज़दीक से चलाई गई थीं, जो साफ़ तौर पर संकेत देता है कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी, न कि मुठभेड़।”
कथित मुठभेड़ वाली रात को ही पुलिस अधिकारियों के उसी समूह ने कथित तौर पर पटियाला में कर्नल बाथ और उनके बेटे पर हमला किया था, यह एक ऐसा मामला था जिसने पहले ही लोगों का ध्यान आकर्षित कर लिया था। इस ताजा घटना ने स्थानीय पुलिस बल की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर जांच को तेज कर दिया है।
पीड़ित परिवार ने इस मामले में न्याय और इसमें शामिल लोगों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि केवल एक केंद्रीय एजेंसी ही पुलिस द्वारा की गई निर्मम हत्या की निष्पक्ष जांच कर सकती है।
अदालत ने पंजाब सरकार और सीबीआई दोनों को जुलाई में अगली सुनवाई से पहले विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले पर कड़ी नज़र रखी जा रही है क्योंकि यह राज्य में कथित फ़र्जी मुठभेड़ मामलों से निपटने के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।

