लुधियाना (पंजाब): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना ने आज पाल सभागार में किसान समिति और फल एवं सब्जी उत्पादकों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की।
इस बैठक में पीएयू के अधिकारियों, फल एवं सब्जी विशेषज्ञों और क्षेत्र भर से बड़ी संख्या में किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फल एवं सब्जी की खेती में किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना और विशेषज्ञ परामर्श एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से व्यावहारिक समाधान तलाशना था।
पीएयू के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. मक्खन सिंह भुल्लर ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और बाजार-आधारित फल एवं सब्जी की खेती की ओर रुख करने के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज के उपभोक्ता पोषण के प्रति तेज़ी से जागरूक हो रहे हैं, इसलिए किसानों को बदलती माँगों को पूरा करने के लिए वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना होगा। उन्होंने पीएयू द्वारा सुझाई गई फ़सल किस्मों और कृषि तकनीकों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर विशेष अतिथि, पीएयू के अनुसंधान निदेशक, डॉ. अजमेर सिंह धत्त ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए बताया कि पीएयू के सब्ज़ी अनुसंधान केंद्र ने राष्ट्रीय स्तर पर ज़बरदस्त पहचान हासिल की है। उन्होंने विश्वविद्यालय की नवीनतम शोध पहलों, विशेष रूप से आलू के बीज प्रौद्योगिकी और फलों की खेती, के बारे में जानकारी दी।
विशेष रूप से, उन्होंने ड्रैगन फ्रूट, अमरूद और किन्नू की उन्नत किस्मों में हुई प्रगति पर चर्चा की। डॉ. धत्त ने प्रगतिशील किसानों की भागीदारी की सराहना की और कृषि नवाचार में उनकी भूमिका को स्वीकार किया।
पीएयू के अतिरिक्त विस्तार शिक्षा निदेशक, डॉ. जी.पी.एस. सोढ़ी ने पिछली बैठक की कार्यवाही पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने पुष्टि की कि पीएयू और उसके क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र किसानों की चिंताओं को प्राथमिकता देते हैं और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करते हैं।
पीएयू के अतिरिक्त संचार निदेशक डॉ. तेजिंदर सिंह रियार ने सत्र के दौरान किसानों की चिंताओं को उठाया। किसानों ने टिकाऊपन बढ़ाने के लिए पारंपरिक गेहूँ-धान चक्र में मक्का और अन्य वैकल्पिक फसलों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने पीएयू के चल रहे शोध के बारे में भी जानकारी ली और धान व बासमती की फसल में नमी कम करने, कम गुणवत्ता वाले पानी के प्रभावी उपयोग, वैज्ञानिक बासमती की खेती, जैविक खेती और नए बागों के विकास से संबंधित प्रासंगिक प्रश्न उठाए।
विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने किसानों के प्रश्नों के मौके पर ही विस्तृत उत्तर दिए। सभी सुझावों और चिंताओं को आगे की कार्रवाई के लिए दर्ज किया गया, और अगली बैठक में अनुवर्ती चर्चाएँ निर्धारित की गईं।

