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क्षेत्रीय खोज केंद्र बठिंडा में रबी की फसलों के लिए पीएयू द्वारा किसान मेला आयोजित

बठिंडा : पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (पीएयू) लुधियाना द्वारा रबी (हाड़ी) की फसलों की बिजाई से पूर्व आयोजित किए जाने वाले किसान मेलों की श्रृंखला के तहत आज क्षेत्रीय खोज केंद्र (रीजनल रिसर्च सेंटर), बठिंडा में किसान मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस मेले में पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि अध्यक्षता पीएयू के कुलपति स. सुखजीत पाल सिंह (आईएएस) ने की।

इस अवसर पर बठिंडा शहरी के विधायक स. जगरूप सिंह गिल, पीएयू प्रबंधकीय बोर्ड के सदस्य स. मोहन सिंह जाखड़, निदेशक अनुसंधान डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. माखन सिंह भुल्लर सहित यूनिवर्सिटी के उच्च अधिकारी भी मंच पर मौजूद रहे। मुख्य अतिथि स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल विविधीकरण (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) और बागवानी को बढ़ावा देना समय की मुख्य आवश्यकता है।

उन्होंने किसानों से गेहूं-धान के चक्र के साथ-साथ कॉ टन (नरमा-कपास) जैसी फसलों की खेती करने और अपनी आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ-साथ सहायक धंधों (प्रोसेसिंग और स्वयं विपणन/मार्केटिंग) को अपनाने की अपील की। देश के अन्न भंडार में पंजाब के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य केंद्रीय पूल में देश के कुल धान का लगभग 40 प्रतिशत और गेहूं का 25 प्रतिशत हिस्सा योगदान देता है, जो किसानों की कड़ी मेहनत और वैज्ञानिकों के शोध का परिणाम है।

पीएयू के कुलपति स. सुखजीत पाल सिंह (आईएएस) ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि यूनिवर्सिटी का उद्देश्य नई खोजों को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर किसान के खेत तक पहुंचाना है। उन्होंने किसान मेलों को केवल बीज खरीद तक सीमित न रखकर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद का माध्यम बनाने पर जोर दिया। पराली प्रबंधन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पराली को समस्या के बजाय एक मूल्यवान कृषि संसाधन मानकर खेत में ही संभालने की ओर ध्यान देने की जरूरत है।

निदेशक अनुसंधान डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट ने बताया कि पीएयू द्वारा अब तक 995 किस्में तैयार कर खेती के लिए अनुशंसित की जा चुकी हैं, जिनमें से 250 से अधिक को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति मिली है। इसके अलावा उन्होंने मोबाइल आधारित सिंचाई सेंसर, मूंग में नीले चिपचिपे कार्ड, गुल्ली-डंडा (खरपतवार) की रोकथाम, सूक्ष्म सिंचाई और पशुओं के चारे (साइलेज) के लिए लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया के उपयोग जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में भी किसानों को अवगत कराया।

विधायक जगरूप सिंह गिल ने किसानों से मेले का लाभ उठाने और कृषि मशीनरी पर पंजाब सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी का फायदा उठाने की अपील की। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. माखन सिंह भुल्लर ने स्वागत भाषण में किसानों को यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक सिफारिशों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। अपर निदेशक संचार डॉ. तेजिंदर सिंह रियाड़ ने मंच संचालन करते हुए किसानों को ‘खेती संदेश’ अखबार, पीएयू के यूट्यूब चैनल और व्हाट्सएप ग्रुप्स से जुड़ने की अपील की।

इंस्टिट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, बठिंडा के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मेले के अंत में क्षेत्रीय खोज केंद्र के निदेशक डॉ. करमजीत सिंह सेखों ने सभी का धन्यवाद किया। मेले में रबी फसलों के प्रमाणित बीजों, फलदार पौधों, आधुनिक कृषि मशीनरी और पीएयू के कृषि साहित्य की रिकॉर्ड बिक्री हुई।

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