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पर्यावरण नियमों पर PPCB की बड़ी कार्रवाई, 25 इलैक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट्स के कनैक्शन काटने के आदेश

लुधियाना: पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने पर्यावरण नियमों की सख्ती से पालना सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से पिछले एक महीने में बड़े स्तर पर विशेष मुहिम चलाई। इस दौरान शहर व औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित लगभग 200 इलैक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट्स की गहन जांच की गई। जांच में सामने आया कि करीब 80 यूनिट्स पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर रही थीं। पीपीसीबी अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान 25 यूनिट्स ऐसी पाई गईं, जो गंभीर स्तर पर पर्यावरण नियमों की अवहेलना कर रही थीं। इन यूनिट्स के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनके बिजली कनैक्शन काटने के आदेश पावरकॉम को भेज दिए गए हैं। वहीं, शेष यूनिट्स पर भारी-भरकम जुर्माना ठोकते हुए अंतिम चेतावनी जारी की गई है।

इस विशेष अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पीपीसीबी ने आंतरिक स्तर पर रणनीतिक बदलाव भी किया। नियमों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए रिजनल ऑफिस (आरओ)-1 की टीम को आरओ-2 से संबंधित क्षेत्रों में जांच के लिए भेजा गया, जबकि आरओ-2 के अधिकारियों से आरओ-1 के अधीन क्षेत्रों में चैकिंग करवाई गई। इससे जांच प्रक्रि या में पारदर्शिता बनाने में मदद मिली और किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई। पीपीसीबी के चीफ इंजीनियर आर.के. रत्तड़ा ने बताया कि बोर्ड द्वारा गैर-कानूनी व अनाधिकृत इलैक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट्स के खिलाफ यह विशेष मुहिम चलाई गई है। उन्होंने कहा कि पिछले काफी समय से विभाग को शिकायतें मिल रही थीं कि कई इलैक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट्स अपना दूषित पानी बिना ट्रीटमैंट के सीधे बुड्ढा दरिया में डिस्चार्ज कर रही हैं, जिससे जल स्त्रोत गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है।

इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इलैक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट्स की वैरीफिकेशन प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान न सिर्फ अनाधिकृत यूनिट्स की पहचान की गई, बल्कि वैध यूनिट्स की कार्यप्रणाली की भी गहनता से जांच की गई। पीपीसीबी अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत उन यूनिट्स की भी जांच की गई, जिन्होंने कॉमन एफलुएंट ट्रीटमैंट प्लांट (सीईटीपी) से अपने दूषित पानी के ट्रीटमैंट के लिए एग्रीमैंट किया हुआ है। जांच में यह परखा गया कि संबंधित यूनिट्स वास्तव में आवश्यक मात्र में दूषित पानी ट्रीट करवा रही हैं या नहीं। इसके साथ ही यह भी जांच की गई कि कहीं इन यूनिट्स ने सीवरेज लाइन में बाईपास लगाकर दूषित पानी बिना ट्रीटमैंट के तो नहीं छोड़ रखा। चीफ इंजीनियर आर.के. रत्तड़ा ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ जल स्त्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए यह मुहिम आगे भी इसी तरह सख्ती से जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी यूनिट को बख्शा नहीं जाएगा।

 

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