
डॉ. गोयल ने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ कई पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ सकता है—इस स्थिति को ‘बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया’ (BPH) कहा जाता है। इसके कारण पेशाब करने में कठिनाई, बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार उठना, पेशाब की धार कमजोर होना, या ऐसा महसूस होना कि मूत्राशय (bladder) पूरी तरह खाली नहीं हुआ है, जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे लक्षणों को केवल उम्र बढ़ने का एक सामान्य और अनिवार्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते चिकित्सीय जांच कराने से सही निदान और उचित उपचार संभव हो पाता है।
जांच के दौरान, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और लक्षणों के आधार पर जरूरी टेस्ट किए जाते हैं। प्रोस्टेट का बढ़ना अपने आप में कैंसर नहीं है, लेकिन प्रोस्टेट कैंसर की संभावना की जांच (स्क्रीनिंग) करना जरूरी हो सकता है। डॉ. गोयल के अनुसार, प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती चरणों में दवाओं के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है। यदि स्थिति गंभीर हो जाती है या दवाओं से आराम नहीं मिलता है, तो मरीज की विशेष स्थिति के आधार पर अन्य उपचार विकल्पों—जिनमें तीन प्रकार की लेजर सर्जरी भी शामिल हैं—पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने पुरुषों को सलाह दी कि यदि उन्हें पेशाब से जुड़ी कोई भी समस्या लगातार बनी रहती है, तो उन्हें किसी विशेषज्ञ (स्पेशलिस्ट) से परामर्श करना चाहिए। समय पर सही निदान और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
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