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किसान संगठनों में टकराव: पंधेर के खिलाफ BKU भानू का प्रदर्शन

Protests Against Pannher Over Rail, Road Blockades : अमृतसर। किसान संगठनों के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। अमृतसर में भारतीय किसान यूनियन भानू की ओर से किसान मजदूर संघर्ष कमेटी और उसके नेता सरवन सिंह पंधेर के खिलाफ प्रदर्शन किया।

इस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने भंडारी पुल पर सरवन सिंह पंधेर का पुतला फूंका और रेल और सड़क रोककर किए जाने वाले आंदोलनों पर सवाल उठाए। भारतीय किसान यूनियन भानू के पंजाब अध्यक्ष लखविंदर सिंह बच्चन ने आरोप लगाया कि लंबे समय से सरवन सिंह पंधेर किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के बैनर तले धरने और प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, रेल ट्रैक और सड़कें रोकने से किसानों के साथ-साथ आम जनता, व्यापारियों, कर्मचारियों और दूर-दराज के क्षेत्रों में काम करने वाले युवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बच्चन ने कहा कि जब रेल यातायात कई घंटों तक प्रभावित होता है तो अमृतसर, जालंधर और लुधियाना के बीच नौकरी तथा कारोबार के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि कई लोग पहले से रेल टिकट बुक करवाकर रखते हैं, लेकिन आंदोलन के कारण ट्रेनें रुकने से उनका पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो जाता है। लखविंदर सिंह बच्चन ने कहा कि यदि किसान संगठनों की किसी मांग को लेकर केंद्र सरकार से समस्या है तो उन्हें दिल्ली जाकर संबंधित मंत्रियों और नेताओं के कार्यालयों अथवा आवासों के बाहर शांतिपूर्ण धरना देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंजाब के भीतर रेल और सड़क यातायात रोकने से आंदोलन का असर सबसे पहले पंजाब की जनता और कारोबार पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अमृतसर धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र है। देश-विदेश से श्रद्धालु श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए अमृतसर पहुंचते हैं। यदि बार-बार रेल यातायात बाधित होता है तो श्रद्धालुओं के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, ऑटो और अन्य पर्यटन आधारित कारोबार भी प्रभावित हो सकते हैं।

पंजाब के कारोबार और रोजगार पर असर’

BKU भानू नेता ने दावा किया कि लगातार होने वाले सड़क और रेल रोको आंदोलनों का असर पंजाब की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने होटल, दुकान या उद्योग किराये पर लेकर अपना कारोबार शुरू किया है, उन्हें पहले ही कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसान आंदोलनों के दौरान आम जनता, उद्योग, व्यापार और नशे की समस्या जैसे मुद्दों को भी उतनी ही गंभीरता से उठाया जाना चाहिए। बच्चन ने कहा कि पंजाब में युवाओं और परिवारों से जुड़े अनेक गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर किसान संगठनों को सरकारों से जवाब मांगना चाहिए।

लखविंदर सिंह बच्चन ने किसान आंदोलन के दौरान किसानों की मौत और उनके परिवारों के मुआवजे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों की मौत हुई थी और उनके परिवारों के लिए मुआवजे तथा अन्य मुद्दों को लेकर पर्याप्त आवाज नहीं उठाई गई। उन्होंने सरवन सिंह पंधेर के चुनावी राजनीति में आने को लेकर भी सवाल उठाए। बच्चन ने आरोप लगाया कि किसान आंदोलन के दौरान किसानों के प्रति पैदा हुई सहानुभूति का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई। हालांकि ये आरोप BKU भानू नेता के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

जहां रेल या सड़क रोकेंगे, वहां करेंगे विरोध’

लखविंदर सिंह बच्चन ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन भानू किसान संगठनों की जायज मांगों का विरोध नहीं करती। उन्होंने कहा कि यदि किसानों के अधिकारों और हितों की बात होगी तो उनका संगठन साथ खड़ा हो सकता है, लेकिन आम जनता को परेशान करके आंदोलन चलाने का विरोध किया जाएगा। उन्होंने सरवन सिंह पंधेर से अपील करते हुए कहा कि किसान और समाज के हित में आंदोलन का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिससे आम जनता को परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि यदि किसान संगठन सरकार से अपनी मांगें मनवाने के लिए संबंधित नेताओं और मंत्रियों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करते हैं तो उनकी ओर से सहयोग पर विचार किया जा सकता है, लेकिन रेल और सड़क यातायात बाधित करने पर उनका संगठन विरोध करेगा।

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