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PSEB की परीक्षा में बड़ी चूक: 8वीं कक्षा के साइंस के पेपर में की गड़बड़ी

Class 8 Science paper tampered with

Class 8 Science paper tampered with

पंजाब डेस्क: मोहाली में आयोजित 8वीं कक्षा की साइंस परीक्षा के दौरान Punjab School Education Board (PSEB) एक गंभीर लापरवाही के कारण विवादों में घिर गया। बता दें कि पंजाबी मीडियम के प्रश्नपत्र में शुक्रवार को कई अनिवार्य प्रश्न छप ही नहीं पाए, जिससे परीक्षा केंद्रों पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और विद्यार्थियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

छह प्रश्न गायब, 15 अंकों पर असर

जानकारी के अनुसार, पंजाबी मीडियम के प्रश्नपत्र में प्रश्न संख्या 28, 29 और 30 शामिल नहीं थे। ये प्रत्येक पांच-पांच अंकों के प्रश्न थे। इसके अलावा कुछ उप-प्रश्न भी गायब बताए गए, जिससे कुल मिलाकर लगभग 15 अंकों का हिस्सा प्रभावित हुआ। परीक्षा के दौरान ड्यूटी स्टाफ को जब यह त्रुटि पता चली तो तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया।

व्हाट्सऐप के जरिए भेजे गए प्रश्न

मामले की गंभीरता को देखते हुए बोर्ड अधिकारियों ने अनुपस्थित प्रश्नों को व्हाट्सऐप के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया। कई केंद्रों पर शिक्षकों ने ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखकर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराए। हालांकि, इस प्रक्रिया में 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त समय लग गया। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के कारण कुछ केंद्रों तक प्रश्न समय पर नहीं पहुंच पाए।

नियमों पर उठे सवाल

परीक्षा नियमों के तहत इनविजिलेटर द्वारा छात्रों से सीधे संवाद या प्रश्नपत्र साझा करना प्रतिबंधित है। ऐसे में डिजिटल माध्यम से प्रश्न भेजना और परीक्षा कक्ष में उन्हें लिखवाना कई प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति से परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता पर प्रभाव पड़ सकता है।

अनुवाद में भी गड़बड़ी

सिर्फ प्रश्नों की कमी ही नहीं, बल्कि शब्दों के अनुवाद को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी। एक प्रश्न में अंग्रेजी में “Cola (Coke)” शब्द का प्रयोग था, जबकि हिंदी और पंजाबी अनुवाद में अलग-अलग शब्द छपे। विज्ञान शिक्षकों का कहना है कि ‘कोला’ और ‘कोक’ अलग-अलग संदर्भों में पढ़ाए जाते हैं, जिससे छात्रों के उत्तर प्रभावित हो सकते हैं।

बोर्ड की सफाई

बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

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अभिभावकों और शिक्षकों की नाराजगी

इस घटना के बाद अभिभावकों और शिक्षकों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और छपाई की प्रक्रिया में गुणवत्ता जांच (Quality Check) की कमी साफ नजर आती है। उन्होंने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराई जाए।

यह घटना शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है। अब देखना होगा कि बोर्ड इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और विद्यार्थियों को हुए संभावित नुकसान की भरपाई कैसे की जाती है।

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