बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (स), बाल कल्याण समिति, जिला बाल सुरक्षा इकाई और पुलिस विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। एडिशनल डिप्टी कमिश्नर श्री जसपिंदर सिंह ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई होने के साथ-साथ कानूनी रूप से भी प्रतिबंधित है। बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास को प्रभावित करता है तथा उन्हें अपने सपने साकार करने के अवसरों से वंचित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए सरकारी विभागों के साथ-साथ समाज के हर वर्ग की सक्रिय भूमिका जरूरी है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए गांवों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अधिक से अधिक जागरूकता गतिविधियां, सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि हालांकि समाज में इस संबंध में जागरूकता पहले की तुलना में बढ़ी है, लेकिन इस बुराई के पूर्ण उन्मूलन के लिए निरंतर जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार विवाह के लिए लड़की की आयु 18 वर्ष और लड़के की आयु **21 वर्ष होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के संज्ञान में बाल विवाह करवाए जाने की कोई जानकारी आती है तो इस संबंध में तुरंत संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल या जिला बाल सुरक्षा इकाई, मोगा से संपर्क किया जाए।
एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ने आम लोगों से भी अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह होने संबंधी जानकारी मिलती है तो बिना किसी डर या झिझक के संबंधित विभागों को सूचित किया जाए। इसके अलावा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर भी जानकारी दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसी सूचना को गोपनीय रखा जाता है। बैठक के दौरान जिला बाल सुरक्षा अधिकारी परमजीत कौर, चेयरमैन बाल कल्याण समिति डॉ. राजेश कुमार पुरी, बाल सुरक्षा अधिकारी सुखवीर कौर, सी.डी.पी.ओ. बहादुर सिंह, पुलिस विभाग से इंस्पेक्टर कुलविंदर कौर तथा शिक्षा विभाग से नीतू सहित अन्य अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे।

