चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गुरुवार को नीति आयोग की टीम के समक्ष राज्य का मजबूत पक्ष रखा और एक तरफ राज्य के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने और दूसरी तरफ राज्य के हितों की रक्षा के लिए उनसे सहयोग मांगा।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद और नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक संजीत सिंह के नेतृत्व वाली टीम के साथ विचार-विमर्श के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि आयोग जल और कृषि के मामले में राज्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने में उदारतापूर्वक मदद करे।
उन्होंने कहा कि राज्य की 553 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान के साथ लगती है तथा छह सीमावर्ती जिले अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर और फाजिल्का हैं।
हालांकि, भगवंत सिंह मान ने दुख जताया कि केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष प्रोत्साहनों से पंजाब के सीमावर्ती जिलों की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के व्यापार और औद्योगिक क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए पंजाब के सीमावर्ती जिलों को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर समर्थन दिए जाने की जरूरत है।
सीमावर्ती जिलों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज की मांग करते हुए उन्होंने पंजाब के प्रत्येक सीमावर्ती जिले में कृषि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की स्थापना की वकालत की, जिसमें बासमती चावल उद्योग और लीची तथा अन्य बागवानी उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। भगवंत सिंह मान ने सीमावर्ती जिलों में मौजूदा फोकल प्वाइंटों को उन्नत करने और अमृतसर में एक प्रदर्शनी-सह-सम्मेलन केंद्र स्थापित करने की भी वकालत की।
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना, कपड़ा क्षेत्र के लिए कर लाभ, उद्योग के लिए माल ढुलाई सब्सिडी और सीमावर्ती जिलों में सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी पर रियायती ब्याज दर की भी मांग की।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सीमा और सीमा बाड़ के बीच भूमि वाले किसानों के लिए मुआवजे में वृद्धि की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा कहा कि इन दोनों के बीच 17,000 एकड़ से अधिक भूमि आती है।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि वर्तमान में किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष मुआवजा दिया जाता है, जिसे बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति एकड़ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच साझा करने के बजाय, यह पूरी तरह से केंद्र द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए क्योंकि ये बहादुर दिल देश को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा की दूसरी पंक्ति को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी 2107 सीमावर्ती गांवों को कवर करने के लिए बॉर्डर विंग होमगार्ड योजना को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने ड्यूटी भत्ते को वर्तमान 45 रुपये प्रतिदिन प्रति जवान (1999 में निर्धारित) से बढ़ाकर कम से कम 655 रुपये प्रतिदिन प्रति जवान करने की भी मांग की तथा कहा कि सीमावर्ती गांवों और बीएसएफ के बीच बेहतर समन्वय के लिए यह आवश्यक है।
भगवंत सिंह मान ने ड्रोन के माध्यम से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए जैमर सहित बुनियादी ढांचे और उपकरणों के उन्नयन के लिए 2829 करोड़ रुपये की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि पंजाब के सीमावर्ती जिलों की आबादी अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है, जहां सीमा से 10 किलोमीटर के अंदर 1500 गांव हैं, जिसके कारण कुल गांवों में से केवल 101 गांवों को ही इस योजना के तहत चुना गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है ताकि सीमावर्ती गांवों और कस्बों में स्थानीय लोगों की अन्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
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