पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों को उनके मुख्य शैक्षणिक कार्यों पर पूरा ध्यान देने में मदद करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पंजाब सरकार ने 1,920 कैंपस मैनेजर नियुक्त किए हैं, ताकि प्रशासनिक बोझ से मुक्त होकर शिक्षक गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पर फोकस कर सकें। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि पंजाब के बच्चों को ऊंचाइयों तक पहुंचाने और उनके सपनों को साकार करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में राज्य में “शिक्षा क्रांति” की शुरुआत की गई थी।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जानकारी दी कि पंजाब सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास से जुड़े विशेषज्ञों के सहयोग से पांच हजार से अधिक शिक्षकों के लिए एक निःशुल्क ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को छात्रों के करियर मार्गदर्शक के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसमें आधारभूत करियर काउंसलिंग, कक्षा शिक्षण के लिए आवश्यक कौशल, व्यक्तिगत मार्गदर्शन तथा उच्च मांग वाले करियर विकल्पों से संबंधित डिजिटल संसाधनों तक निःशुल्क पहुंच प्रदान की जा रही है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग ने 25 हजार शिक्षकों के लिए एक निःशुल्क गूगल प्रमाणन कार्यक्रम भी शुरू किया है, जिसका उद्देश्य डिजिटल साक्षरता बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शिक्षण कौशल विकसित करना है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण पर पंजाब सरकार के विशेष फोकस को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 234 प्राचार्यों और शिक्षा अधिकारियों को सिंगापुर में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं 152 हेड टीचरों को भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद में उन्नत कोचिंग मिली है और 144 प्राथमिक शिक्षकों ने फिनलैंड की तुर्कू विश्वविद्यालय में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि शिक्षक समाज को आकार देने वाले राष्ट्र निर्माता होते हैं। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षक को “गुरु” कहा जाता था, जो संस्कृत के दो शब्दों “गु” अर्थात अंधकार और “रु”अर्थात हटाने वाला से मिलकर बना है। गुरु का अर्थ है अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि “शिक्षा क्रांति” के तहत पंजाब में अब तक 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं, जिन पर कुल 231.74 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म दी जा रही है, छात्राओं के लिए बस सेवा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है तथा सशस्त्र बलों, नीट, जेईई, क्लैट और निफ्ट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के अनुसार स्कूल ऑफ एमिनेंस और अन्य सरकारी स्कूलों के 265 विद्यार्थियों ने जेईई मेन, 44 विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस और 848 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है। उन्होंने कहा कि ये स्कूल आधुनिक युग के मंदिरों की तरह हैं, जो हजारों विद्यार्थियों के जीवन को ज्ञान से रोशन कर रहे हैं। इस मॉडल की सफलता का प्रमाण यह है कि अब निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी स्कूल ऑफ एमिनेंस में प्रवेश लेने के इच्छुक हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने यह भी बताया कि राज्य में अभिभावक-शिक्षक बैठक की अवधारणा को दोबारा मजबूत किया गया है, जिसे माता-पिता का भरपूर समर्थन मिला है। पंजाब में वर्तमान में 19,200 सरकारी स्कूल हैं और लगभग 25 लाख अभिभावकों ने इन बैठकों में भाग लिया है।

