पंजाब के पहाड़ी और ऊंचाई वाले कंडी क्षेत्रों को बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने कंडी बेल्ट के उन इलाकों तक नहर से सिंचाई पहुंचाने में सफलता हासिल की है, जहां दशकों से पानी नहीं पहुंच पाया था। इस विकास को लंबे समय से चली आ रही जल समस्या के समाधान और पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस प्रगति का मुख्य आधार काठगढ़ लिफ्ट इरिगेशन योजना है, जो 214 करोड़ रुपये की परियोजना है, जिसके माध्यम से पहली बार ऊंचाई वाले कृषि क्षेत्रों तक नहर का पानी पहुंचाना संभव हुआ है। शहीद भगत सिंह नगर जिले के 33 गांवों में फैली यह योजना लगभग 11,500 एकड़ भूमि को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी, जो पहले अधिकतर अनियमित वर्षा पर निर्भर थी।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना पंजाब की सिंचाई रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, जिसमें भौगोलिक बाधाओं को दूर करने के लिए आधुनिक तकनीकी समाधानों पर ध्यान दिया जा रहा है। यह लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम बिस्त दोआब नहर से पानी खींचकर उच्च क्षमता वाले पंपों के माध्यम से पाइपलाइन नेटवर्क की ओर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंचाता है।
यह योजना कई चरणों में लागू की जा रही है। पहला चरण पहले ही शुरू हो चुका है, जो हजारों एकड़ भूमि को कवर कर रहा है, जबकि अगले चरण 2026 के अंत तक कवरेज को और बढ़ाएंगे। इसमें संचालन लागत कम करने के लिए सोलर ऊर्जा घटक भी शामिल किया गया है। किसानों को तत्काल लाभ के साथ-साथ इस परियोजना से दीर्घकालिक आर्थिक लाभ की भी उम्मीद है। बेहतर सिंचाई से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा, भूमि की उत्पादकता बढ़ेगी और उन क्षेत्रों में कृषि आय में वृद्धि होगी जहां पहले खेती सीमित थी।
बेहतर सिंचाई उपलब्धता के कारण कंडी क्षेत्र में भूमि के मूल्य में सुधार होने की भी संभावना है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार बलाचौर क्षेत्र में सिंचाई कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और कई गांवों को नियमित पानी आपूर्ति प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इस योजना के लिए बड़े पैमाने पर पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता न पड़े।
यह पहल पंजाब सरकार के उस व्यापक निवेश कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे राज्य में सिंचाई प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 6,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें नहर नेटवर्क का सुधार, नई पाइपलाइन का निर्माण और लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्रों तक जल आपूर्ति का विस्तार शामिल है।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप नहर के पानी का उपयोग 2022 में लगभग 26 प्रतिशत से बढ़कर अब लगभग 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से भूजल पर निर्भरता कम हो रही है, जिससे जल स्तर में सुधार, बिजली की खपत में कमी और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार देखा जा रहा है।
लंबे समय से बंद कंडी नहर प्रणाली को भी फिर चालू किया गया है, जिससे उन क्षेत्रों तक पानी पहुंचा है जहां तीन दशक से अधिक समय से सिंचाई नहीं हुई थी। पुराने ढांचे के पुनर्निर्माण और नए नेटवर्क के विस्तार से एक लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि को लाभ हुआ है। आधारिक संरचना विकास के साथ-साथ सरकार ने घरेलू आर्थिक दबाव कम करने के लिए कल्याणकारी उपाय भी लागू किए हैं, जिनमें मुफ्त बिजली और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार ये प्रयास कृषि सुधारों के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र स्थिरता को मजबूत कर रहे हैं। काठगढ़ लिफ्ट इरिगेशन जैसी परियोजनाओं के साथ कंडी क्षेत्र धीरे-धीरे राज्य के मुख्य कृषि विकास एजेंडे का हिस्सा बन रहा है, जो मजबूरी से अवसर की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाता है।

