Last Updated: September 25, 2026

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पंजाब सरकार ने नहर से सिंचाई का कवरेज बढ़ाकर किया 78%, टिकाऊ खेती को मिला बढ़ावा

May 4, 2026

पंजाब सरकार ने नहर से सिंचाई का कवरेज बढ़ाकर किया 78%, टिकाऊ खेती को मिला बढ़ावा

पंजाब ने अपने सिंचाई नेटवर्क में बड़ी प्रगति की है। अब नहर का पानी लगभग 78 प्रतिशत खेती योग्य भूमि तक पहुंच रहा है। यह उपलब्धि राज्य में टिकाऊ खेती की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है।

यह विस्तार कुछ साल पहले केवल 21 प्रतिशत कवरेज से बढ़कर हुआ है, जो मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा नहर सिंचाई प्रणाली को पुनर्जीवित और मजबूत करने के लगातार प्रयासों को दर्शाता है। इस विकास को भूमिगत पानी  पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पंजाब की कृषि व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि नहर के पानी पर बढ़ती निर्भरता राज्य में घटते भूमिगत पानी स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जो दशकों से धान की खेती के कारण दबाव में है। सिंचाई ढांचे में सुधार और पानी के बेहतर वितरण से राज्य धीरे-धीरे एक संतुलित और टिकाऊ कृषि मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

पंजाब ने ऐतिहासिक रूप से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेषकर हरित क्रांति के दौरान लेकिन इसी मॉडल के कारण भूमिगत पानी का अत्यधिक दोहन हुआ और पर्यावरण पर दबाव बढ़ा।

नहर में सिंचाई के हालिया विस्तार को अब फसल उत्पादन बनाए रखते हुए पारिस्थितिक संतुलन सुधारने के एक बेहतर मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। बेहतर सिंचाई कवरेज से फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों के लिए दालें, मक्का, कपास और बागवानी फसलों की ओर बढ़ना आसान हो सकता है, जो क्षेत्र की जलवायु परिस्थितियों के लिए अधिक उपयुक्त हैं।

अधिकारियों ने कहा कि सिंचाई ढांचे को मजबूत करना पंजाब सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके तहत नहरों के आधुनिकीकरण, पानी की क्षमता बढ़ाने और अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए निवेश किया जा रहा है। पंजाब सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर ठोस परिणाम देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

सरकार सिंचाई सुधारों को व्यापक कृषि सुधारों से जोड़ रही है, जिसमें पानी के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना और किसानों की खेती लागत को कम करना शामिल है। नहर के पानी की उपलब्धता बढ़ाकर ट्यूबवेल पर निर्भरता कम करने और भूजल दोहन से जुड़ी ऊर्जा खपत घटाने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचाई कवरेज में यह बड़ी उपलब्धि लंबे समय की कृषि समस्याओं के समाधान पर केंद्रित शासन प्रणाली को दर्शाती है। जैसे-जैसे पंजाब फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ रहा है, नहर सिंचाई का विस्तार पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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