पंजाब में नशे की समस्या से जूझ रहे हजारों परिवारों के लिए पंजाब सरकार का ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान एक बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस अभियान का मकसद सिर्फ नशा बेचने वालों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों को सही इलाज और नया जीवन देना भी है। पंजाब सरकार ने इस पहल के तहत नशे की तस्करी पर सख्ती बढ़ाई है, नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूत किया है और गांव-गांव तक लोगों को इस लड़ाई में शामिल करने की कोशिश की है। इसका असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।
समाज को जोड़ने की कोशिश
इस अभियान ने नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल सरकारी कदम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक सामूहिक आंदोलन का रूप दिया है। लोगों को आगे आकर अपने अनुभव साझा करने, एक-दूसरे का साथ देने और नशे के नुकसान के बारे में जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे कई परिवारों को हिम्मत मिली है कि वे इस समस्या से बाहर निकल सकते हैं। ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान की शुरुआत मार्च 2025 में की गई थी। इसे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का पूरा समर्थन मिल रहा है। दोनों नेताओं ने इसे पंजाब के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा बताया है। अभियान के पहले चरण को लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने के बाद पंजाब सरकार ने जुलाई 2025 में इसका दूसरा चरण शुरू किया। इस चरण में नशा छोड़ चुके लोगों की रिकवरी और पुनर्वास पर खास जोर दिया जा रहा है, ताकि वे दोबारा नशे की ओर न लौटें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
पंचायतों का मिला साथ
इस अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के लिए गांवों की पंचायतों को भी जोड़ा गया है। अब तक 3,000 से ज्यादा पंचायतों ने नशे के खिलाफ प्रस्ताव पास कर पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर काम करने की सहमति दी है। कानून-व्यवस्था के लिए विशेष डीजीपी अर्पित शुक्ला के अनुसार, 3,022 पंचायतों ने नशे की रोकथाम, तस्करी की सूचना देने और नशा मुक्ति को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला लिया है।
नशा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई
इस अभियान के तहत नशा बेचने वालों और सप्लाई चेन से जुड़े लोगों पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। बीते कुछ महीनों में हजारों ड्रग तस्कर और पेडलर गिरफ्तार किए गए हैं। सरकार का साफ संदेश है कि पंजाब में नशे से किसी को मुनाफा कमाने नहीं दिया जाएगा। प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि अगर उन्हें नशे से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो बिना डर के आगे आएं। सरकार का कहना है कि जनता का सहयोग मिलने से ही नशे के कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
पंजाब को नशा-मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम
कुल मिलाकर ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान पंजाब को नशा-मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास बनकर उभरा है। सख्त कानून, इलाज की सुविधा और समाज की भागीदारी इन तीनों के जरिए सरकार नशे के खिलाफ एक लंबी और निर्णायक लड़ाई लड़ने की तैयारी में है।

