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पंजाब के राज्यपाल कटारिया ने डिजिटल कल्याण पहलों की शुरूआत की

चंडीगढ़: पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने आज चंडीगढ़ प्रशासन के समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा डिजिटल कल्याण पहलों की एक श्रृंखला की शुरूआत की, साथ ही केंद्र शासित प्रदेश सचिवालय में जनता दरबारों के माध्यम से नागरिकों के साथ अपनी सीधी पहुंच भी जारी रखी। इन ऐतिहासिक डिजिटल पहलों में 11 सामाजिक कल्याण योजनाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शामिल करना, पेंशन जीवन प्रमाण पत्र के लिए लाभार्थी सत्यपान एप्लिकेशन (बीएसए) का शुभारंभ और केंद्र शासित प्रदेश सचिवालय में एक डिजिटल कियोस्क की स्थापना शामिल है।

इन कदमों का उद्देश्य कल्याणकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और कुशल बनाना है। कटारिया ने कहा कि ये पहल डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे समाज के हर वर्ग को सरकारी सहायता तक आसान और तेज पहुंच सुनिश्चित होती है। उन्होंने दोहराया कि प्रौद्योगिकी को शासन को लोगों, विशेषकर सबसे कमजोर तबके के लोगों के करीब लाने के लिए एक सेतु का काम करना चाहिए। 11 कल्याणकारी योजनाओं के डिजिटलीकरण से, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, विधवाएँ, निराश्रित महिलाएँ और आश्रित बच्चे जैसे लाभार्थी अब कहीं से भी, कभी भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे – जिससे बोङिाल कागजी कार्रवाई और सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत खत्म हो जाएगी।

इस बदलाव से लाभ प्रक्रिया में भी तेजी आएगी और सरकारी सहायता तक समान पहुंच सुनिश्चित होगी। नया लॉन्च किया गया लाभार्थी सत्यापान एप्लिकेशन (बीएसए) पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा सुधार है, जो उन्हें आधार-आधारित चेहरे के प्रमाणीकरण के माध्यम से डिजिटल रूप से जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में सक्षम बनाता है। इस अवसर पर केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के मुख्य सचिव राजीव वर्मा; राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक प्रताप सिंह; केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़; और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के वित्त सचिव दीप्रवा लाकड़ा सहित प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर, श्री कटारिया ने आज केंद्र शासित प्रदेश सचिवालय में एक जनता दरबार की अध्यक्षता भी की। नागरिकों ने सार्वजनिक सेवाओं, नागरिक सुविधाओं और व्यक्तिगत शिकायतों से संबंधित मुद्दे उठाए, जिन्हें धैर्यपूर्वक सुना गया और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए मौके पर ही उनका समाधान किया गया। राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि ये जनता दरबार न केवल नागरिकों की आवाज सुनने का एक मंच हैं, बल्कि समय पर और प्रभावी समाधान प्रदान करने का एक तंत्र भी हैं। आमने-सामने संवाद सुनिश्चित करके, यह पहल प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पाटती है, शासन में जवाबदेही और विश्वास को बढ़ावा देती है।

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