चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा सरकार ने पराली जलाने के मामलों में कमी करने के लिए नै पहल शुरू की है। बता दें कि इस समस्या को निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश पर अब पंजाब और हरियाणा सरकारों ने एक व्यापक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इस बार, केंद्र सरकार की केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की विशेष टीमों को हॉटस्पॉट इलाकों में निगरानी के लिए तैनात किया जा रहा है।
1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक रहेगी विशेष निगरानी
CAQM की सिफारिश पर CPCB के उड़न दस्ते 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक दोनों राज्यों के उन ज़िलों में तैनात रहेंगे जहां पराली जलाने की घटनाएं सबसे अधिक सामने आती हैं। इन टीमों का उद्देश्य न केवल पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखना है, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट भी तैयार करना है।
किन जिलों में तैनात हैं उड़न दस्ते?
पंजाब और हरियाणा के कुल 16 जिलों में ये टीमें सक्रिय रूप से कार्य करेंगी। इनमें पंजाब के अमृतसर, बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब और हरियाणा के हिसार, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर शामिल हैं।
स्थानीय एजेंसियों से समन्वय
इन उड़न दस्तों को स्थानीय प्रशासन, कृषि विभाग, और पुलिस विभाग का सहयोग मिलेगा। सभी टीमें संबंधित ज़िलों के नोडल अधिकारियों के सीधे संपर्क में रहेंगी और हर दिन की गतिविधियों की रिपोर्ट CAQM और CPCB को भेजी जाएगी। रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि जिला प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए हैं।
जल्द बनेगा ‘धान पराली प्रबंधन प्रकोष्ठ’
CAQM ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही मोहाली या चंडीगढ़ में एक धान पराली प्रबंधन प्रकोष्ठ स्थापित करेंगे। यह प्रकोष्ठ कृषि विभाग, पर्यावरण विभाग और दोनों राज्यों की सरकारों के बीच समन्वय का केंद्र होगा। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक समाधान तैयार करना और किसानों को पराली प्रबंधन के लिए वैकल्पिक उपाय उपलब्ध कराना होगा।
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