पटियाला : उत्तर भारत में पराली जलाने की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप लेती दिख रही है। बता दें कि पंजाब में बीते कुछ दिनों में खेतों में आग लगाने के मामलों में तेज़ उछाल दर्ज किया गया है। रविवार को अकेले एक दिन में 440 नए मामले सामने आए, जिससे अब तक कुल घटनाओं की संख्या बढ़कर 4,000 से पार हो गई है। प्रशासन का कहना है कि पिछले साल की तुलना में आंकड़ा कुछ कम है, लेकिन हालिया वृद्धि ने पर्यावरण विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
पंजाब-हरियाणा में बिगड़े हालात!
पंजाब का मालवा इलाका इस बार भी पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे है। संगरूर जिले में अब तक 650 से अधिक घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बाद तरनतारन, फिरोज़पुर, अमृतसर और बठिंडा में भी सैकड़ों मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल देर से हुई धान की कटाई और बीच-बीच में हुई बारिश के कारण किसानों को गेहूं की बुवाई में देरी का डर सताने लगा है। इसी जल्दी में खेतों को साफ़ करने के लिए कई किसान पराली जलाने का रास्ता चुन रहे हैं।
किसानों का कहना है कि पराली को मशीनों से हटाने की लागत बहुत अधिक है। “सरकार अगर हमें सब्सिडी या पर्याप्त सहायता दे तो हम भी पराली नहीं जलाना चाहते,” एक किसान ने बताया। उनके अनुसार, समय पर बोआई न होने से पूरी फसल चक्र पर असर पड़ सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ जाएगा।
सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार किसानों से कर रहे अपील
सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार किसानों से अपील कर रहे हैं कि पराली जलाना बंद करें, क्योंकि इससे प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, राज्य में इस सीजन के दौरान अब तक करीब 11 हजार पराली जलाने की घटनाएँ दर्ज की गई हैं।
हरियाणा में भी पराली संकट गहराया
हरियाणा में भी स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। बीते 24 घंटों में 67 नए मामले सामने आए हैं, जो इस साल का सबसे बड़ा दैनिक आंकड़ा है। फतेहाबाद, कैथल, कुरुक्षेत्र और झज्जर जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। दिल्ली से सटे बहादुरगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) रविवार को 370 तक पहुँच गया, जिसे “गंभीर” श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह रुझान जारी रहा तो आने वाले दिनों में उत्तर भारत की हवा और अधिक जहरीली हो सकती है। सरकारें सख्ती और जागरूकता दोनों पर ज़ोर दे रही हैं, लेकिन किसानों की आर्थिक दिक्कतें इस संकट को और जटिल बना रही हैं।

