Punjab Pensioners to Boycott August 24 Meeting : मोगा। पंजाब गवर्नमेंट पेंशनर्स एसोसिएशन ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ 24 अगस्त को प्रस्तावित बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि सरकार डीए के बकाया भुगतान को किस्तों में जारी करने के जरिए हाईकोर्ट के फैसले को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
पेंशनर्स नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार द्वारा महंगाई भत्ते (डीए) से संबंधित माननीय हाईकोर्ट के फैसले को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार विभिन्न संगठनों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कर डीए की बकाया राशि को किस्तों में जारी करने पर सहमति बनाने का प्रयास कर रही है। नेताओं ने कहा कि जिन अधिकारियों पर हाईकोर्ट के समक्ष डीए के भुगतान को लेकर देरी करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, उन्हीं अधिकारियों द्वारा छठे वेतन आयोग के बकाया भुगतान को वर्ष 2028-29 तक करने का फार्मूला भी पेश किया गया था। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ संगठन दोबारा बकाया राशि को किस्तों में देने के प्रस्ताव पर सहमति जता सकते हैं।
पेंशनर्स नेताओं ने 2.59 के गुणांक सहित विभिन्न मांगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट की 12 अगस्त को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ बैठक हो चुकी है और सरकार को कई बार मांग पत्र भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पेंशनर्स की मांगें स्वीकार करना चाहती है तो बार-बार बैठकें करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनकी मांगों से संबंधित दस्तावेज पहले ही सरकार के पास मौजूद हैं। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि डीए के मुद्दे पर सरकारी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक का उद्देश्य पेंशनर्स संगठनों को आपस में बांटना और उन्हें कर्मचारियों व पेंशनरों के बीच जवाबदेह बनाने का प्रयास हो सकता है।
इसी के चलते एसोसिएशन ने विचार-विमर्श के बाद 24 अगस्त की बैठक में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया है। पेंशनर्स नेताओं ने पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट में शामिल अन्य संगठनों से भी अपील की कि वे बैठक से पहले आपस में विचार-विमर्श करें तथा पंजाब सरकार को बैठक में शामिल न होने संबंधी पत्र भेजें। उन्होंने 17 अगस्त को सरकार द्वारा डीए के संबंध में जारी पत्र का भी विरोध करते हुए कड़े शब्दों में निंदा की। नेताओं के अनुसार, इस पत्र में डीए के भुगतान को लेकर वित्त विभाग से मंजूरी लेने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है, जिसे वे पेंशनर्स के हितों के विपरीत मानते हैं।

