चंडीगढ़: पंजाब पुलिस ने रविवार को पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाया, जिसका नाम ‘OPS सील-XIII’ रखा गया। इस अभियान का मकसद राज्य में नशा और शराब तस्करी पर रोक लगाना था। यह अभियान पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव के निर्देश पर चलाया गया। राज्य के सभी सीमावर्ती जिलों में पुलिस ने नाके लगाए और आने-जाने वाले वाहनों की सख्ती से जांच की। स्पेशल डीजीपी अर्पित शुक्ला की अगुवाई में इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया है।
कहां-कहां चला अभियान?
यह अभियान पंजाब के 10 अंतरराज्यीय सीमावर्ती जिलों में चलाया गया, जिनकी सीमाएं अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से मिलती हैं। ये जिले हैं:
1. पठानकोट
2. श्री मुक्तसर साहिब
3. फाजिल्का
4. रूपनगर
5. एसएएस नगर (मोहाली)
6. पटियाला
7. संगरूर
8. मानसा
9. होशियारपुर
10. बठिंडा
अभियान की मुख्य बातें
स्पेशल डीजीपी अर्पित शुक्ला ने अभियान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 92 प्रमुख रास्तों पर 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की मदद से मजबूत नाके लगाए गए। 4244 वाहनों की जांच की गई। नियम तोड़ने पर 511 चालान काटे गए और 39 वाहन जब्त किए गए। राज्य भर में 490 जगहों पर छापेमारी की गई। 109 मामले दर्ज किए गए और 136 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। तस्करों से 11.3 किलोग्राम हेरोइन और 3.48 लाख रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई। पिछले 78 दिनों में 11,860 नशा तस्कर गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
कितनी पुलिस टीमों ने हिस्सा लिया?
-95 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में
-200 से ज्यादा पुलिस टीमों ने
-1400 से अधिक जवानों के साथ
-पूरे राज्य में यह कार्रवाई की।
-अभियान में 532 संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई।
नशा मुक्त पंजाब की ओर एक और कदम
पुलिस ने ‘नशामुक्ति’ अभियान के तहत 103 लोगों को नशा छुड़ाने और पुनर्वास केंद्रों में इलाज के लिए तैयार किया।
तीन-स्तरीय रणनीति
पंजाब सरकार और पुलिस ने नशे के खिलाफ एक तीन-आयामी रणनीति अपनाई है, जिसे ईडीपी (Enforcement, De-addiction, Prevention) कहा गया है। इसका मतलब है- प्रवर्तन (Enforcement)- कानून का सख्ती से पालन। दूसरा है नशामुक्ति (De-addiction)- इलाज और काउंसलिंग और तीसरा है रोकथाम (Prevention)- जागरूकता और रोकथाम।
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