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बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का संदेश देता है दशहरा: सरदार परगट सिंह

जालंधरः असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरे के पावन अवसर पर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सरदार परगट सिंह ने जालंधर के विभिन्न दशहरा समारोहों में शिरकत की। उन्होंने जालंधर कैंट हलके के गांव भोड़े सपराय से अपने कार्यक्रमों की शुरुआत की। इसके बाद वह गांव जंडियाला, जालंधर कैंट दशहरा ग्राउंड और गढ़ा में आयोजित दशहरा समारोहों में पहुंचे। दिन के अंतिम कार्यक्रम में उन्होंने लाडोवाली रोड पर आयोजित दशहरा समारोह में भाग लिया, जहां रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया।

इस दौरान विभिन्न दशहरा कमेटियों के पदाधिकारियों और आयोजकों ने सरदार परगट सिंह का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें सम्मानित भी किया। उन्होंने सभी आयोजकों को दशहरे के सफल आयोजन के लिए बधाई दी तथा क्षेत्रवासियों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं।

इस अवसर पर सरदार परगट सिंह ने कहा कि “दशहरा केवल रावण के पुतले जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार, नफरत, अन्याय और बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेने का दिन है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य, मर्यादा, न्याय और जनकल्याण के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। आज जरूरत है कि हम इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में आपसी भाईचारे, सद्भावना तथा एकता को और मजबूत करें।”

उन्होंने कहा कि त्योहार हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। ऐसे अवसर लोगों को आपस में जोड़ने, आपसी प्रेम बढ़ाने और समाज में सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने का काम करते हैं। उन्होंने कामना की कि दशहरे का पर्व पंजाब और देश के हर परिवार के जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली लेकर आए।

सरदार परगट सिंह ने कहा कि दशहरा जैसे त्योहार हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी नैतिक मूल्यों और आदर्शों को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज की असली तरक्की तभी संभव है, जब हम जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल हों और आपसी भाईचारे को प्राथमिकता दें। ऐसे त्योहार लोगों को एक मंच पर लाकर सामाजिक एकता और सद्भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने दशहरा समारोहों के आयोजकों और स्थानीय निवासियों की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सफल बनाने में समाज के हर वर्ग का योगदान प्रशंसनीय है। उन्होंने अपील की कि त्योहारों को आपसी प्रेम, सम्मान और शांति के साथ मनाया जाए तथा आने वाली पीढ़ियों को सत्य, ईमानदारी, सेवा और न्याय के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास किया जाए।

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