Site icon Dainik Savera Times

पंजाब विश्वविद्यालय बचाओ मोर्चा ने 10 नवंबर को पीयू बंद का किया आह्वान

चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की और केंद्र की उस अधिसूचना को वापस लेने की मांग की, जिसमें पंजाब विश्वविद्यालय के शासी निकायों सीनेट-सिंडिकेट के पुनर्गठन का प्रस्ताव है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, सांसद मालविंदर सिंह कंग, गुरमीत सिंह मीत हेयर, विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी और देविंदरजीत सिंह लाडी, वतनवीर सिंह प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए चीमा ने एनडीए सरकार पर विश्वविद्यालय पर ‘पूर्ण नियंत्रण पाने के इरादे से विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था को तबाह करने पर आमादा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह अधिसूचना लोकतांत्रिक व्यवस्था को नष्ट करने के लिए जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इस अधिसूचना से न केवल पीयू प्रभावित होगा बल्कि पंजाब के लगभग 200 संबद्ध कॉलेज भी प्रभावित होंगे। इस बीच पंजाब विश्वविद्यालय में पीयू बचाओ मोर्चा के बैनर तले धरना जारी रहा और कई किसान यूनियनों के लीडर और डैमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) के नेता भी धरनास्थल पर पहुंचे और साथ ही कल सभी स्कूल-कालेजों के गेट पर अधिसूचना की कॉपी जलाने का आह्वान किया। इसी के साथ पीयू बचाओ मोर्चा ने 10 नवंबर को पीयू बंद का भी आह्वान किया है।

अकाली नेता हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने छात्रों से बात करते हुए कहा कि वे पुरानी सीनेट की बहाली और चुनाव की डेट की मांग का समर्थन करते हैं। साथ ही उन्होंने पंजाब की ओर से बकाया राशि पीयू को तत्काल देने की भी मांग की। सांसद मलविंदर सिंह कंग और गुरमीत सिंह मीत हेयर भी छात्रों को मिलने पहुंचे और राज्यपाल से मुलाकात के बारे में भी बताया। लेकिन यहां आंदोलनकारी छात्रों ने इन दोनों जनप्रतिनिधियों की अच्छी क्लास ले ली। गुस्साए छात्रों ने सवाल किया कि जब अरविंद केजरीवाल को कुछ होता है तो सभी 92 विधायक दिल्ली पहुंच जाते हैं मगर अब पीयू सीनेट भंग कर दी यहां उनके साथ बैठने कोई नहीं आया। कुछ छात्रों ने विरोध में नारेबाजी भी शुरू कर दी जिसके बाद ये दोनों सांसद वहां से चले गए।

छात्रों ने बहस की कि वे राज्यपाल के पास तो पहुंच गए मगर उनके पास क्यों नहीं आये। आप, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी), वामपंथी छात्र संगठन, सोपू और कई स्वयं सेवी संगठन पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट के पुनर्गठन के केंद्र के कदम का विरोध कर रहे हैं, जो कि 28 अक्तूबर की अधिसूचना के माध्यम से किया गया था। अधिसूचना पंजाब विश्वविद्यालय अधिनियम, 1947 में संशोधन करती है, जिसके तहत सीनेट के सदस्यों की संख्या 91 से घटाकर 31 कर दी गई है तथा इसके कार्यकारी निकाय, सिंडिकेट के लिए चुनाव समाप्त कर दिए गए हैं, सिंडिकेट में सभी 10 सदस्य मनोनीत होंगे। साथ ही सीनेट की ग्रेजुएट कांस्टीचुएंसी को समाप्त कर दिया गया है जिससे 15 सीनेटर चुनकर आते थे।

ये भी पढ़ें : बाबिल खान ने फोटोशूट से इंटरनेट पर मचाई हलचल, फैंस को नए प्रोजेक्ट का इंतजार

Exit mobile version