जालंधर: पंजाब (जालंधर) का सबसे बड़ा और मॉडल सिविल अस्पताल बुधवार को करीब 10 घंटे अंधेरे में डूबा रहा। अस्पताल की बत्ती गुल होने के चलते स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित रहीं। हालांकि, इस वजह से अस्पताल में इलाज को आए मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी से दो-चार होना पड़ा। अस्पताल के वार्ड, कॉरिडोर और अन्य डिपार्टमैंट अंधेरे में डूबे होने के चलते वहां दाखिल मरीज और उनके परिजन अस्पताल प्रबंधकों की इस बदइंतजामी के चलते उन्हें कोसते नजर आए।
सिविल अस्पताल का आलम यह था कि मरीजों के परिजनों को इधर-उधर जाने के लिए मोबाइल की टार्च जलाकर जैसे-तैसे काम चलाना पड़ा। अस्पताल के वार्डो में इंस्टाल इनवर्टर से वहां की लाइटें या इक्का-दुक्का पंखे ही चल रहे थे। ऐसे में वार्डो में उपचाराधीन मरीजों को हाल बेहाल हो गया। मरीजों के परिजनों ने पत्रकारों से बातचीत में अस्पताल के प्रबंधों को सुचारू बनाने में विफल साबित हुए प्रबंधकों की कारगुजारी पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उधर, सिविल अस्पताल की कार्यकारी मैडीकल सुपरिंटैंडैंट डा. वरिंदर कौर थिंद ने बातचीत में अस्पताल में बुधवार को करीब 10 घंटे बिजली की सप्लाई बाधित रहने की बात स्वीकारी।
उन्होंने कहा कि बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश के चलते सिविल अस्पताल के इलैक्ट्रीसिटी कंट्रोल पैनल की तारों में भी पानी चला गया। इस वजह से सिविल अस्पताल में बिजली की सप्लाई बाधित रही। उन्होंने कहा कि सिविल में मरीजों को कोई परेशानी न पेश आए, इसके लिए अस्पताल में जैनरेटर और इनवर्टर से बिजली की सप्लाई को सुचारू बनाया गया।
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