चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। लुधियाना से कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान की ओर से प्रदेश नेतृत्व में बदलाव का फैसला किए जाने के बाद वड़िंग ने अपना इस्तीफा दिया।राजा वड़िंग के इस्तीफे की पुष्टि उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल से भी हुई। उन्होंने अपने प्रोफाइल में खुद को ‘पूर्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष’ लिखा है। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि अब वह पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर नहीं हैं।
करीब साढ़े चार साल संभाली पंजाब कांग्रेस की कमान
राजा वड़िंग ने अप्रैल 2022 में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। अब करीब साढ़े चार साल बाद पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व में बदलाव का फैसला किया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब पंजाब विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बाकी हैं।
पिछले कुछ समय से पंजाब कांग्रेस के अंदर नेताओं के बीच मतभेद और संगठन को लेकर खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। इसी बीच पार्टी हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के संगठन को लेकर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की और नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मंथन शुरू हुआ।
एक-दो दिन में नए प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान संभव
राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंजाब कांग्रेस की कमान किस नेता को सौंपी जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटे में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जा सकता है।
विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे आगे
नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। कई रिपोर्टों में उन्हें इस पद की दौड़ में आगे बताया गया है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा नहीं की गई है।
इन नेताओं के नाम भी चर्चा में
विजय इंदर सिंगला के अलावा परगट सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई नेताओं के नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में कुछ अन्य नेताओं के नाम भी संभावित दावेदारों के तौर पर सामने आए हैं। अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान की ओर से किया जाना है।
चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव
पंजाब कांग्रेस में यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हुआ है। अब नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने पार्टी संगठन को संभालने और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। फिलहाल सभी की नजरें कांग्रेस हाईकमान के अगले फैसले पर टिकी हैं।

