Last Updated: November 5, 2026

Dainik Savera Times Logo

चंडीगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया 100वां स्थापना पर्व, किया गया शस्त्र पूजन

October 12, 2025

चंडीगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया 100वां स्थापना पर्व, किया गया शस्त्र पूजन

चंडीगढ़: आज अधर्म पर धर्म की विजय के पर्व विजयदशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपना 100वां स्थापना पर्व मनाया। आज के दिन 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी ने कुछ तरुणों को लेकर नागपुर में संघ की स्थापना की, और आज यह संगठन दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में समारोह आयोजित हुए, चंडीगढ़ शहर के रामलीला ग्राउंड धनास प्रांगण में हुए समारोह के दौरान समारोह के अध्यक्ष संघ के पदाधिकारी माननीय महानगर संघ चालाक विपिन वासुदेव जी और मुख्य वक्ता प्रदीप जोशी जी अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जी ने विधिवत शस्त्र पूजन किया।

समारोह में क्षेत्र के गणमान्य बन्धु/भगिनी व 510 से अधिक स्वयंसेवक बन्धु (पूर्ण गणवेश 223)उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रदीप जोशी जी ने कहा कि ‘स्व’ बोध, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य निर्वहन, समरसता व आदर्श परिवार प्रणाली से ही भारत का समग्र विकास हो पाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण व उत्थान के लिए वहां के नागरिकों का चरित्रवान व देशभक्ति के गुणों से परिपूर्ण होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संघ चरित्र निर्माण से राष्ट्र निर्माण की कार्यपद्धति को लेकर राष्ट्र के परमवैभव के लिए काम कर रहा है।

संघ अधिकारी प्रदीप जोशी जी ने कहा कि गुरुजी ने अपने जीवन को समर्पण कर मानवाधिकारों व मानवीय मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने संदेश दिया कि दुनिया में हर धर्म समान है और किसी को धर्म के आधार पर दूसरों पर अत्याचार करने, किसी को धर्म बदलने के लिए विवश करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि स्वधर्म की रक्षा के लिए अगर जीवन का बलिदान देना पड़े तो भी मानव को पीछे नहीं हटना चाहिए।

संघ द्वारा दिए गए पंच परिवर्तनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ‘स्व’ के बोध, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य निर्वहन, समरसता व आदर्श परिवार प्रणाली आदि पांच बिन्दुओं पर चल कर हम अपने देश का उत्थान कर सकते हैं। संघ का मानना है कि एक सशक्त, सुसंकृत, और प्रत्येक क्षेत्र में प्रगतिशील राष्ट्र के लिए सामाजिक समरसता अनिवार्य प्रत्यय हैं।

जाति, धर्म, वंश और लिंग के आधार पर विभेदित कोई भी राष्ट्र राष्ट्रीय एकता, अक्षुण्णता और आंतरिक सुरक्षा के स्तर पर विकास के मापांक को प्राप्त नहीं कर सकता है। संघ ‘परिवार’ को भारतीय संस्कृति, मूल्यों, आदर्शों और संस्कारों की आधारशिला मानता है। पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव और आधुनिक जीवनशैली के दबाव के कारण पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है। कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से हम अपने परिवारों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के प्रति सजग व अग्रसर कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण समकालीन परिदृश्य में एक बड़ी वैश्विक चुनौती है और भारत को भी पर्यावरणीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन और प्रदूषणों ने पर्यावरण को बहुत अधिक मात्रा में नुकसान पहुंचाया है जिसका मानव जीवन और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस लिए हमारे लिए पर्यावरण हितौषी जीवन शैली आवश्यक है। प्रदीप जोशी जी ने कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता अति आवश्यक है। उपभोक्तावादी संस्कृति और आयात पर अत्यधिक निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था एवं भारतीय संस्कृति के लिए अति हानिकारक है।

भारतीय उत्पादों को अपने स्थानीय व्यवसायों को अपनाने एवं उनका उन्नयन करने और भारतीयों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना स्वाधारित जीवनशैलीका अभिन्न भाग है। स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने वाले अभियानों को प्रेरित करना, पारंपरिक कौशल और उद्योगों को पुनर्जीवित करने का प्रयत्न करना आवश्यक है। नागरिक कर्तव्यों के बारे बोलते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञानवान एवं उन्नतशील लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए उसके नागरिकों को अपने मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार होना अतिआवश्यक है।

कर्तव्यों के पालन से ही एक स्वस्थ एवं नागरिक समाज का निर्माण हो सकता है। नागरिक कर्तव्य के प्रति दायित्ववादिता से स्पष्ट है कि नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हों एवं ईमानदारी से उनका पालन करें। नागरिक कर्तव्यों के अंतर्गत मतदान करना, करों का भुगतान करना, सार्वजनिक संपत्ति की संरक्षण करना, कानून का पालन करना और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन्हीं पंच परिवर्तनों पर आधारित कार्यक्रम लेकर संघ समाज के बीच जा रहा है।

इस अवसर पर समारोह के विपिन वासुदेव जी ने कहा कि अपने सद्कर्मों व सकारात्मक कार्यपद्धति के चलते संघ अपने जीवन के 100 सालों में देशभक्ति, आपसी भाईचारे और सेवा का दूसरा नाम बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश में जब भी संकट आता है तो संघ के स्वयंसेवक आगे बढ़ कर अपने राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करते हैं। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने शस्त्र पूजन किया।

ये भी पढ़ें: नेशनल अचीवमेंट सर्वे में पंजाब ने बाजी मारी, सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने JEE और NEET में योग्यता प्राप्त की: CM भगवंत सिंह मान

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें