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बाढ़ संभावित क्षेत्रों पर नजर रखेंगे SDM, ड्रेनेज विभाग सतलुज के पानी की अफसरों को देगा रियल टाइम अपडेट

लुधियाना SDM : मानसून सीजन में बाढ़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन राहत एवं बचाव की तैयारियों में जुट गया है। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने मंगलवार को बचत भवन में बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों के संबंध में बैठक की। समीक्षा बैठक में डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने एसडीएम्स को सख्त हिदायतें दी हैं कि वो बाढ़ संभावित क्षेत्रों पर नियमित नजर रखें ताकि बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में परेशानी न हो।

वहीं दूसरी तरफ डीसी ने ड्रैनेज विभाग के अफसरों को कहा है कि वो सतलुज में आने वाले पानी के प्रवाह पर लगातार नजर रखें और प्रशासन के अधिकारियों को पानी के बहाव की रियल टाइम अपडेट दें। बैठक में एडीसी अमरजीत बैंस, शिखा भगत, कुलप्रीत सिंह, आईएएस ट्रैनी डॉ. प्रगति रानी, सभी एसडीएम, ड्रैनेज विभाग, नगर निगम, एनडीआरएफ, पीएसपीसीएल, शिक्षा विभाग, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन, वन, जल सप्लाई, पुलिस सहित तमाम अहम विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

डीसी ने सतलुज धुस्सी बांध का लिया जायजा
डीसी ने बैठक से पहले सतलुज के धुस्सी बांध, ड्रैनेज सिस्टम व फ्लड बैरियर्स की स्थिति का जायजा लिया। डीसी ने अधिकारियों को कहा कि सभी विभाग आपस में मिलकर बाढ़ प्रबंधन के लिए काम करें। डीसी ने कहा कि सभी विभागों के बीच समन्वय अत्यंत जरूरी है। इसके लिए नियमित बैठकें, मौके की समीक्षा और सूचनाओं का रियल टाइम आदान-प्रदान करें। आपात स्थिति में सूचना प्रवाह के लिए एकीकृत कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल लागू किया गया है।

24 घंटे एक्टिव फ्लड कंट्रोल रूम किया स्थापित
उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी मशीनरी जैसे वाटर पंप, जनरेटर, रेस्क्यू बोट व अन्य मशीनरी की टैस्टिंग करके उन्हें पहले ही बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पहुंचा दें। डीसी ने कहा कि जिला और एसडीएम स्तर पर 24 घंटे एक्टिव फ्लड कंट्रोल रूम भी स्थापित कर दिए गए हैं जो आपात स्थिति में लोगों की मदद करेंगे। डीसी ने कहा कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अस्थाई राहत शिविर पहले ही तैयार रखे जाएं। अस्थायी राहत शिविरों में भोजन, पानी, साफ-सफाई, शौचालय और बिस्तर की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए ताकि किसी आपात स्थिति में विस्थापित लोगों को तुरंत राहत दी जा सके।

विभागों को दी ये जिम्मेदारियां

स्वास्थ्य विभाग: डीसी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मैडीकल टीमें, एंबुलैंस, जरूरी दवाइयों, फस्र्ट एड किट और टीकों का पर्याप्त स्टॉक तैयार रखें ताकि बाढ़ के पानी से होने वाली बीमारियों व अन्य बीमारियों से लोगों को बचाया जा सके।

पशुपालन व कृषि विभाग: डीसी ने पशुपाल विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बाढ़ की स्थिति में लोगों के पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए और साथ में बाढ़ की स्थिति में पशुओं के चारे की व्यवस्था की जाए। पशु चिकित्सकों की टीमें भी बनाई जाएं। कृषि विभाग को फसलों का सव्रेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

वाटर सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग: डीसी ने वाटर सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग के अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वो मौसम विज्ञान विभाग के साथ समन्वय बनाकर उनसे मौसम का सटीक पूर्वानुमान लेकर जोखिम वाले इलाकों में अलर्ट जारी करें। अलर्ट एसएमएस, रेडियो, मीडिया और सोशल मीडिया के साथ-साथ मुनादी करवाकर लोगों को पहले ही खतरे की जानकारी देंगे।

पीएसपीसीएल: डीसी ने पीएसपीसीएल के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वो अस्पतालों और कंट्रोल रूम जैसी अहम सुविधाओं में बैकअप बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें।

पीडब्ल्यूडी : डीसी ने पीडब्ल्यूडी को सभी पुलों और सड़कों की मजबूती की जांच कर मरम्मत के निर्देश दिए ताकि बाढ की स्थिति में आवागमन बाधित न हो।

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