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SGPC अध्यक्ष और पदाधिकारियों के चुनाव के लिए 20 नवंबर को आम बैठक होगी – एडवोकेट धामी

अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट और दूसरे ऑफिस बेयरर्स के सालाना चुनाव के लिए 20 नवंबर को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की जनरल मीटिंग बुलाई गई है। यह फैसला आज शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की अध्यक्षता में इंटरिम कमेटी की मीटिंग में लिया गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की यह आम मीटिंग दोपहर 12:00 बजे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के हेडक्वार्टर, एस. तेजा सिंह समुंदरी हॉल में हुई, जिसमें प्रेसिडेंट, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, जूनियर वाइस प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी और अंतरिम कमेटी के मेंबर चुने जाएंगे। इसके साथ ही अंतरिम कमेटी ने कई और ज़रूरी फैसले भी लिए।

अंतरिम कमेटी की तरफ से पास किए गए एक प्रस्ताव में ड्रग्स के खिलाफ लड़ रहे भाई परविंदर सिंह की हत्या की कड़ी निंदा की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि पंजाब में ड्रग्स का बढ़ता चलन बहुत चिंता की बात है, लेकिन सरकार ड्रग्स के खिलाफ एक्शन लेने के बजाय सिर्फ उन लोगों पर एक्शन ले रही है जो ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाते हैं। भाई परविंदर सिंह भी सरकार की इसी नाकामी का शिकार हुए। पंजाब के युवाओं को ड्रग्स की बुराई से बचाने के लिए शहीद भाई परविंदर सिंह के संघर्ष और इस मकसद के लिए दी गई शहादत को हमेशा याद रखने के मकसद से, अंतरिम कमेटी ने श्री दरबार साहिब कॉम्प्लेक्स में बने सेंट्रल सिख म्यूजियम में उनकी तस्वीर लगाने को मंजूरी दे दी।

अंतरिम कमेटी ने हाल ही में मानसा में ड्रग्स के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल करीब 40 युवाओं के खिलाफ पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने, कुछ युवाओं को गिरफ्तार करने और प्रदर्शन के दौरान सिखों की पगड़ी उतारने और महिलाओं के साथ बदतमीजी करने की कड़ी निंदा की है। इस बारे में लाए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि पंजाब की युवा पीढ़ी को ड्रग्स के दलदल से बाहर निकालना समय की जरूरत है और इसके लिए आवाज उठाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। हालांकि, ऐसे प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करना, प्रदर्शन में शामिल सिखों की पगड़ी उतारना और महिलाओं के साथ बदतमीजी करना लोकतांत्रिक मूल्यों और युवाओं की जायज आवाज को दबाने वाला कदम है। अंतरिम कमेटी ने पंजाब सरकार से युवाओं के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लेने की जोरदार मांग की। को तुरंत कैंसिल किया जाए, गिरफ्तार किए गए नौजवानों को बिना देर किए रिहा किया जाए और ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वालों को टारगेट करने के बजाय ड्रग्स के धंधे में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इसी तरह, शहीद भाई परविंदर सिंह की हत्या के विरोध में पोस्टर हटाते समय करंट लगने से हुई मौत पर दुख जताते हुए उनके परिवार को 2.5 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने को भी मंजूरी दी गई। मीटिंग में जून 1984 में उस समय की कांग्रेस सरकार द्वारा सचखंड श्री हरमंदिर साहिब पर हमले के विरोध में बगावत करने वाले 479 सिख धार्मिक सैनिकों को 50-50 हजार रुपये की मदद देने को भी मंजूरी दी गई। मीटिंग के दौरान शिरोमणि कमेटी के कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता देने का भी फैसला किया गया।

इससे पहले शिरोमणि कमेटी के सदस्य सरदार अमरजीत सिंह भलाईपुर, जत्थेदार सूबा सिंह डबवाला और शहीद भाई परविंदर सिंह के निधन पर मूलमंत्र और गुरमंत्र का जाप करके उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष स. रघुजीत सिंह विर्क, कनिष्ठ उपाध्यक्ष स. बलदेव सिंह कल्याण, महासचिव स. शेर सिंह मंडवाला, मुख्य सचिव स. कुलवंत सिंह मनन, अंतरिम सदस्य स. सुरजीत सिंह गढ़ी, स. सुरजीत सिंह तुगलवाल, स. सुरजीत सिंह कंग, स. दलजीत सिंह भिंडर, बीबी हरजिंदर कौर, स. मेजर सिंह ढिल्लों, ओएसडी स. सतबीर सिंह, सचिव स. बलविंदर सिंह काहलवां, निजी सचिव स. शहबाज सिंह, अतिरिक्त सचिव स. भगवंत सिंह धंगेरा, स. तेजिंदर सिंह पड्डा, स. प्रीतपाल सिंह, स. जसविंदर सिंह जस्सी, उप सचिव स. गुरदयाल सिंह, स. गुरनाम सिंह, स. मनजीत सिंह तलवंडी, स. हरभजन सिंह वक्ता, स. आजाद दीप सिंह, श्री दरबार साहिब के जनरल मैनेजर स. मेजर सिंह, कानूनी सलाहकार एडवोकेट अमनबीर सिंह सियाली, पूर्व. स. जतिंदरपाल सिंह, इंचार्ज स. प्रजिंदर सिंह, स. गुरप्रीत सिंह रोडे, स. जगदीश सिंह बुट्टर, स. गुरप्रताप सिंह, स. तरसेम सिंह आदि शामिल हैं।

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