SGPC Organises Gurmat Samagam at Historic Gurdwara : अमृतसर। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु नानक घाट साहिब में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से गुरमत समागम आयोजित किया गया।
इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। समागम के दौरान गुरबाणी कीर्तन, ढाडी वारों और कविशरी के माध्यम से संगत को सिख इतिहास, विरासत और गुरु साहिबानों की शिक्षाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। एसजीपीसी के सचिव बलविंदर सिंह कहलवां ने गुरुद्वारा साहिब के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगत की सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देशों पर धर्म प्रचार कमेटी क्षेत्र में सिख मिशन को मजबूत करेगी। इस पहल का उद्देश्य गुरु साहिबानों की शिक्षाओं, आपसी भाईचारे, निस्वार्थ सेवा और ‘सरबत दा भला’ के संदेश का प्रचार-प्रसार करना है।
इस ऐतिहासिक तीर्थस्थल का प्रबंधन सचखंड श्री हरमंदिर साहिब (श्री दरबार साहिब) के प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। ‘संगत’ (श्रद्धालुओं) की सुविधा के लिए ठहरने की व्यवस्था और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर काम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देशों के अनुसार, ‘धर्म प्रचार कमेटी’ (धार्मिक प्रसार समिति) इस क्षेत्र में सिख मिशन को मजबूत करेगी ताकि धार्मिक प्रचार-प्रसार को और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
इस पहल के माध्यम से, प्रचारक, ढाडी (पारंपरिक गाथा गायक) और कविशर (पारंपरिक कवि) संगत को सिख इतिहास और विरासत से जोड़ने का प्रयास करेंगे। उन्होंने संगत से अपना सहयोग जारी रखने की अपील की। सचिव एस. बलविंदर सिंह कहलवां के नेतृत्व में, शिरोमणि कमेटी के अधिकारियों ने संगत की सुविधा के लिए बनाई गई सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था और चल रही परियोजनाओं का भी जायजा लिया।
इस मौके पर, स्थानीय सिख समुदाय ने शिरोमणि कमेटी की पहलों की तारीफ़ की और कहा कि इस प्रमुख सिख संस्था की कोशिशों से पूरे समुदाय का मान-सम्मान बढ़ता है।
कार्यक्रम के दौरान, रागी जत्थों (भजन-कीर्तन करने वाले समूहों) ने गुरबानी कीर्तन किया, जबकि ढाडी और कविशर समूहों ने लोगों को उनके इतिहास से जोड़ा।
गुरबानी और गुरमत की शिक्षाओं के ज़रिए, रागी, ढाडी और कविशर समूहों ने लोगों को गुरु साहिबानों द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया—एक ऐसा रास्ता जो सबकी भलाई (सरबत दा भला), आपसी भाईचारे, निस्वार्थ सेवा, सिमरन (ध्यान) और इंसानी एकता पर ज़ोर देता है। इस मौके पर एस. हरपाल सिंह भाटिया (अध्यक्ष, सेंट्रल श्री गुरु सिंह सभा, इंदौर—मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़), एस. चरणजीत सिंह कालरा, ग्रंथी सिंह ज्ञानी सुरजीत सिंह, बाबा तरलोचन सिंह, एस. इकबाल सिंह गांधी, एस. मंजीत सिंह डांग, एस.एस. नारंग,
बीबी अलका अरोड़ा, शिरोमणि कमेटी के XEN एस. जतिंदरपाल सिंह, एस. सुखजिंदर सिंह, और इंदौर व उज्जैन से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिनमें सुरजीत सिंह डांग, एस. राजविंदर सिंह ठुकराल, डॉ. बलबीर सिंह मक्कर, बीबी सतनाम कौर और एस. सतनाम सिंह गांधी शामिल थे।

