SGPC Pays Tribute to Saragarhi Martyrs : अमृतसर। सारागढ़ी की लड़ाई की बरसी के मौके पर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने यहाँ गुरुद्वारा सारागढ़ी साहिब में ‘श्री अखंड पाठ साहिब’ के समापन के बाद एक ‘गुरमत’ कार्यक्रम आयोजित किया।
इस मौके पर, ‘हजूरी रागी’ भाई नरिंदर सिंह के जत्थे (समूह) ने ‘गुरबानी कीर्तन’ किया और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के ‘ग्रंथी’ सिंह साहिब ज्ञानी गुरमिंदर सिंह ने धार्मिक प्रवचन (‘कथा’) दिया। सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास बताते हुए, ज्ञानी गुरमिंदर सिंह ने कहा कि सिख सैनिकों ने बहादुरी से लड़ते हुए शहादत प्राप्त की। इन बहादुर सिखों के बेमिसाल बलिदान को पूरी दुनिया में याद किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान सारागढ़ी की लड़ाई के शहीदों के परिवारों को भी ‘सिरोपाओ’ (सम्मान के वस्त्र) देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर अतिरिक्त मैनेजर एस. बिक्रमजीत सिंह झांगी के साथ-साथ शहीदों के परिवार के सदस्य, जिनमें भाई मंजीत सिंह, भाई रंजीत सिंह, भाई सरबजोत सिंह और बीबी राजविंदर कौर जालंधर शामिल थे। इस बीच, कार्यालय से जारी एक बयान में, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने सारागढ़ी की लड़ाई के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिख सैनिकों की वीरता का प्रमाण है, क्योंकि 21 बहादुर सिख योद्धाओं ने 10,000 सैनिकों की सेना का सामना किया था। उन्होंने कहा कि सारागढ़ी में शहीद हुए सिख सैनिक समर्पण और दृढ़ता की मिसाल थे; उनकी बहादुरी के कारण ही आज इन नायकों की गाथा पूरी दुनिया में सुनाई जाती है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय हमेशा इन सिख सैनिकों द्वारा दिखाई गई वीरता पर गर्व करेगा।

