अमृतसर: चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी के जन्मदिवस को समर्पित अलग-अलग जगहों पर हो रहे इवेंट्स की सीरीज के तहत ईस्ट मोहन नगर के गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी में गुरमत समागम का आयोजन किया गया। इस मौके पर अलग-अलग रागी जत्थों और कथावाचकों ने गुरबानी कीर्तन और गुरु इतिहास शेयर करके संगत को गुरु साहिब की शिक्षाओं से जोड़ा। इवेंट के दौरान संगत ने गुरबानी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु साहिब के पवित्र जीवन, उनकी शिक्षाओं और सिख धर्म में उनके महान योगदान को याद किया।
इस मौके पर कथावाचक भाई जसविंदर सिंह दर्दी ने कहा कि श्री गुरु रामदास जी ने अपने जीवन और शिक्षाओं के जरिए इंसानियत को आपसी प्यार, मेलजोल, बराबरी और सेवा के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। उनके बताए गुरमत सिद्धांत भी इंसान को सच्ची ज़िंदगी, विनम्रता और भलाई की दिशा दिखाते हैं। ऐसे गुरमत कार्यक्रम गुरुओं की विचारधारा को संगत तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को उनकी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस मौके पर सिख विद्वान डॉ. इंद्रजीत सिंह गोगोआनी को भाई प्यारा सिंह संगीत घराने की ओर से सिख धर्म, गुरमत विचारधारा और सिख इतिहास से जुड़ी उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान शिरोमणि रागी भाई जसवंत सिंह के परिवार की ओर से दिया गया। गौरतलब है कि यह सम्मान हर साल किसी शख्सियत को दिया जाता है।
इससे पहले हजूरी रागी भाई हरजीत सिंह, भाई सरवन सिंह और बीबी हरलीन कौर के जत्थों ने गुरबानी कीर्तन के जरिए कार्यक्रम में शिरकत की। इस मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के OSD स. सतबीर सिंह धामी, शिरोमणि रागी भाई जसवंत सिंह, स. चरण सिंह बेदी, बीबी सुखजीत कौर, स. हरिंदरपाल सिंह भुल्लर, डॉ. रविंदर सिंह, स. गुरचरण सिंह, बीबी किरणदीप कौर और दूसरे भक्त मौजूद थे।

