
पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट 1900 के दायरे से हटाई गई ज़मीनों से जुड़ी डिपार्टमेंट की मुश्किलों को दूर करने के लिए एक कॉमन सर्कुलर जारी करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्ताव में लिस्ट से हटाए गए हर ‘खसरा’ (ज़मीन का टुकड़ा) का स्टेटस साफ करने, ऐसे मामलों के लिए एक स्पेशल रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाने और यह पक्का करने की बात कही गई है कि सभी डिपार्टमेंट में एक कॉमन ‘खसरा स्टेटस सर्टिफिकेट’ को मान्यता मिले।
विभागों के बीच कोऑर्डिनेशन की दिक्कतों को कम करना
प्रस्तावित ‘सिंगल सर्कुलर’ का मकसद इस प्रोसेस को आसान और एक जैसा बनाना है। सुझाव में कहा गया है कि ज़मीन का स्टेटस साफ़ होने के बाद, संबंधित डिपार्टमेंट उस एक सर्टिफ़िकेट के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।
वन विभाग के नए एसओपी से प्रोसेस में क्लेरिटी
14 सितंबर को पंजाब फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट द्वारा जारी नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का स्वागत किया। यह एसओपी फ़ॉरेस्ट क्लियरेंस की ज़रूरत वाले मामलों के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स की एक चेक-लिस्ट बताता है। इस एसओपी में 13 ज़रूरतें शामिल हैं जो ‘बंद’ और ‘खुले’ पीएलपीए एरिया से जुड़े मामलों को कवर करती हैं। इनमें पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट’ (एनओसी) लेना और आस-पास के ‘चोआन’ (वेदरिंग ड्रेन), नालों और नदियों पर डिवीज़नल फ़ॉरेस्ट ऑफ़िसर (डीएफओ) से रिपोर्ट लेना शामिल है।
सुखना इको-सेंसिटिव ज़ोन (ईको-सेंसिटिव एरिया) पर सुझाव
प्रस्ताव में पंजाब में सुखना ईको-सेंसिटिव ज़ोन को फ़ाइनल करने का मुद्दा भी उठाया गया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि 2009 में दी गई सेंट्रल मंज़ूरी (जिसके तहत इसे डीलिस्ट किया गया था) की शर्तों और कोर्ट के आदेशों के बीच किसी भी टकराव से बचने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से ज़रूरी स्पष्टीकरण मांगा जाए। इस मकसद के लिए, यह भी सुझाव दिया गया है कि एडवोकेट जनरल के जरिये हाईकोर्ट में ज़रूरी एप्लीकेशन फाइल की जाए।