पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि ड्रोन के जरिए हो रही घुसपैठ आज पंजाब के सामने खड़ी सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा समस्याओं में से एक है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन का इस्तेमाल खासतौर पर नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी के लिए बढ़ा है, जो राज्य की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है।मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस समस्या को और भी गंभीर बना देता है यह तथ्य कि ज़्यादातर ड्रोन भारत की सीमा के बाहर से उड़ाए जाते हैं। ऐसे में पारंपरिक पुलिस या सुरक्षा बलों के लिए तुरंत कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
एंटी-ड्रोन तकनीक से खत्म हो रहा सुरक्षा का खालीपन
ड्रोन खतरे से निपटने के लिए अब एंटी-ड्रोन सिस्टम बेहद जरूरी हो गए हैं। पहले सीमा सुरक्षा बल और पुलिस के पास ड्रोन को रोकने के सीमित साधन थे, लेकिन नई तकनीक ने इस कमी को काफी हद तक दूर कर दिया है।
इन आधुनिक सिस्टम में तीन अहम चरण होते हैं:
डिटेक्शन (पता लगाना):
रडार, रेडियो सिग्नल और आवाज़ के जरिए ड्रोन की पहचान।
पहचान (वेरिफिकेशन):
यह तय करना कि ड्रोन दुश्मन का है या किसी वैध काम के लिए उड़ रहा है।
निष्क्रिय करना: ड्रोन का सिग्नल जाम करना, उसे जबरन उतारना या हवा में ही बेअसर कर देना। पंजाब में बाज़ अख’ एंटी-ड्रोन सिस्टम कतैनाती इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। अब लक्ष्य सिर्फ तस्करी का सामान पकड़ना नहीं, बल्कि ड्रोन को सीमा में घुसने से पहले ही रोकना है।
तकनीक में तस्कर आगे हैं सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक तस्कर अब बेहद तकनीक-समझदार हो गए हैं। वे सस्ते लेकिन बदले हुए वाणिज्यिक ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें पहले से सेट जीपीएस रास्ते, एन्क्रिप्टेड सिग्नल, ज्यादा वजन उठाने की क्षमता शामिल होती है। ये कोई एक-दो बार की कोशिशें नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह संगठित और लगातार चलने वाले ऑपरेशन हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में एंटी-ड्रोन सिस्टम नहीं होते, वहां तस्कर उन्हें आसान निशाना मान लेते हैं। इसलिए यह तकनीक सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि डर पैदा करने वाला (डिटरेंट) साधन भी है।
मुद्दा सिर्फ ड्रग्स तक सीमित नहीं
हालांकि नशीले पदार्थ सबसे बड़ी चिंता हैं, लेकिन दुनिया भर में ड्रोन का इस्तेमाल हथियार, गोला-बारूद और जासूसी उपकरण ले जाने के लिए भी किया गया है। इस वजह से यह समस्या अब सिर्फ स्वास्थ्य या कानून व्यवस्था की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बन चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकी संगठन और संगठित अपराध गिरोह इस तकनीक का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं, इसलिए ड्रोन की शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है।
सरकार की मजबूत रणनीति
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह तस्करों के खिलाफ “मजबूत और सख्त जवाब” है। उन्होंने बताया कि सशस्त्र बल और बीएसएफ पहले से ही ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है जिसने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन तकनीक तैनात की है। यह सीमा पार से ड्रग्स भेजने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है। सरकार का मानना है कि सिर्फ नशे की मांग को कम करने से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए सुरक्षा, पुनर्वास और समुदाय स्तर पर जागरूकता- तीनों को साथ लेकर चलना जरूरी है। नई चुनौती, नई सुरक्षा आज सीमाएं सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आसमान भी सुरक्षा का मोर्चा बन चुका है। इसलिए अब जरूरत है ऐसी तकनीक की जो तेज़, सटीक और समझदारी से काम करे। एंटी-ड्रोन सिस्टम इसी बदलते खतरे का जवाब है।

