पंजाब डेस्क: पटियाला में एन.ओ.सी. को लेकर लोगों को भारी दिक्कतें आ रही है। बता दें कि पटियाला डिवेलपमेंट अथॉरिटी (PDA) की कार्यप्रणाली पर फिलहाल विराम लगा हुआ है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर उन लोगों को झटका लगा है जिन्होंने अनधिकृत कॉलोनियों के प्लॉट वैध करवाकर निर्माण कार्य शुरू किया या रजिस्ट्री के लिए एन.ओ.सी. की अर्जी दी थी।
सूत्रों के अनुसार, पी.डी.ए. के एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर छुट्टी पर हैं और उनकी अनुपस्थिति में सरकार ने अस्थाई रूप से पुड्डा हैडक्वार्टर के ए.सी.ए. राकेश पोपली को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन उन्होंने अब तक न तो चार्ज संभाला है और न ही पी.डी.ए. कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। ऐसे में बीते 15 दिनों से एन.ओ.सी. जारी नहीं की जा रही, जिससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
एन.ओ.सी. न मिलने से रुक गए रजिस्ट्रेशन के काम
जिन लोगों के प्लॉट या मकान बिक्री के लिए तैयार हैं, वे रजिस्ट्री न हो पाने से चिंता में हैं। यदि समय पर दस्तावेज पूरे न हों, तो कानूनी झंझट शुरू हो सकते हैं। सरकार द्वारा पहले एन.ओ.सी. प्रक्रिया को खत्म करने की कोशिश की गई थी ताकि लोगों को राहत मिल सके, लेकिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के बाद यह निर्णय निरस्त कर दिया गया। परिणामस्वरूप, एन.ओ.सी. फिर से अनिवार्य हो गई है।
सरकारी खजाने को भी नुकसान
संपत्ति कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि एन.ओ.सी. प्रक्रिया में रुकावट से केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि सरकार को भी राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे आम आदमी पार्टी की छवि पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि यह मुद्दा जनता में नाराजगी का कारण बन रहा है।
घनौर में नायब तहसीलदार की कमी से सरकारी कामकाज ठप
पटियाला जिले के अंतर्गत आने वाले घनौर कस्बे के लोग भी प्रशासनिक अनदेखी का शिकार हैं। यहां लंबे समय से नायब तहसीलदार का पद खाली है। अस्थाई तौर पर तैनात अधिकारी के पास केवल रजिस्ट्री करने का अधिकार है, लेकिन अन्य जरूरी काम जैसे एफिडेविट बनवाना, राजस्व से संबंधित मामलों का निपटारा आदि नहीं हो पा रहे।
स्थानीय निवासी और भारतीय किसान उत्थान मजदूर यूनियन के प्रदेश प्रचार सचिव जत्थे. सुखजीत सिंह बघौरा ने बताया कि उन्हें खुद अपनी जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए राजपुरा जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोग पहले ही मुश्किल में हैं, ऐसे में अतिरिक्त खर्चा और समय बर्बाद करवाना अन्याय है। उन्होंने एफ.सी.आर. पंजाब और डिप्टी कमिश्नर पटियाला से मांग की कि घनौर में जल्द से जल्द नियमित नायब तहसीलदार की नियुक्ति की जाए ताकि स्थानीय स्तर पर ही राजस्व से जुड़े कार्य पूरे किए जा सकें।
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