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अमृतसर में आवारा कुत्तों ने ली बुजुर्ग की जान; नगर निगम वं मेयर कार्यालय पर उठे गंभीर सवाल

अमृतसर: मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control) नियमों के पालन पर जोर दिए जाने के बावजूद अमृतसर में हालात लगातार बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। इसका सबसे दर्दनाक उदाहरण इस्लामाबाद क्षेत्र की चौकिया वाली गली में देखने को मिला, जहां 74 वर्षीय गुरदीप सिंह पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

जानकारी के अनुसार गुरदीप सिंह शनिवार रात करीब साढ़े 10 बजे अपने एक रिश्तेदार के घर से लौट रहे थे। इसी दौरान गली में घूम रहे पांच से सात आवारा कुत्तों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने खुद को बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन कुत्तों ने उन्हें जमीन पर गिराकर शरीर के कई हिस्सों पर बुरी तरह नोच डाला। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। शहर के कई इलाकों से लगातार आवारा कुत्तों के हमलों की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन नगर निगम की ओर से न तो प्रभावी डॉग कैचिंग अभियान चलाया गया और न ही पशु जन्म नियंत्रण (ABC) एवं नसबंदी कार्यक्रम का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। अब शहर में कई सवाल गूंज रहे हैं : जब मुख्यमंत्री लगातार इस समस्या के समाधान के निर्देश दे चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट भी कानून के तहत वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर जोर दे चुका है, तो अमृतसर नगर निगम और मेयर कार्यालय आखिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों कर रहे हैं? क्या प्रशासन किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।

गुरदीप सिंह की मौत ने केवल एक परिवार का सहारा नहीं छीना, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब शहरवासी मांग कर रहे हैं कि लंबित प्रक्रियाओं को तुरंत पूरा किया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी एवं कानून सम्मत समाधान लागू किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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