
लुधियाना: वायु प्रदूषण के स्तर ने लुधियाना की सांसें फिर से भारी कर दी हैं। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सी.पी.सी.बी.) के आधिकारिक मोबाइल एप्प ‘समीर’ के अनुसार, मंगलवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडैक्स (एक्यूआई) स्तर 200 से 230 के बीच दर्ज किया गया। यह स्थिति ‘खराब’ श्रेणी में आती है, जो विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गो और अस्थमा रोगियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा पैदा करती है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) द्वारा जारी सैटेलाइट डाटा के अनुसार 15 सितंबर से 4 नवंबर 2025 तक लुधियाना के आसपास के इलाकों में 74 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि केवल 4 नवंबर को ही 17 स्थानों पर पराली फूंकी गई। इस धुएं ने शहर की हवा को और अधिक जहरीला बना दिया है।
पीपीसीबी के नोडल अफसर एक्सियन अमृतपाल सिंह चाहल ने बताया कि पराली फूंकने पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए रैवेन्यू विभाग और पुलिस प्रशासन की सहायता ली जा रही है। रैवेन्यू अधिकारी अपने स्तर पर जुर्माने लगा रहे हैं, वहीं पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में किसानों को पर्यावरण अनुकूल विकल्पों जैसे हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमैंट सिस्टम आदि के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
हालांकि पिछले वर्षो की तुलना में पराली फूंकने की घटनाओं में कुछ कमी आई है लेकिन मोगा, फिरोजपुर, जगराओं, बठिंडा और बरनाला जैसे इलाकों से उठने वाला धुआं अब भी लुधियाना की आबो-हवा को खराब कर रहा है। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। वहीं मंगलवार शाम को मौसम ने करवट ली और बारिश से हवा में घुले जहर से कुछ राहत मिली।
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