तरनतारन: जिले में विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों ने जिला स्तरीय विशेष खेल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। जिला शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित इन खेलों में विद्यार्थियों ने 68 से अधिक स्थान हासिल कर जिले का नाम रोशन किया। प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न ब्लॉकों से 82 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पुलिस लाइन स्टेडियम में आयोजित हुई प्रतियोगिताएं
जिला स्तरीय विशेष खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन पुलिस लाइन स्टेडियम, तरनतारन में किया गया। इन खेलों का आयोजन उप जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) राजिंदर कौर के नेतृत्व में हुआ।
प्रतियोगिता का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच प्रदान करना और खेलों के प्रति उनका उत्साह बढ़ाना था।
तीन आयु वर्गों में हुए मुकाबले
प्रतियोगिताओं को 8 से 11 वर्ष, 12 से 15 वर्ष और 16 से 21 वर्ष के तीन आयु वर्गों में आयोजित किया गया। इसमें दौड़, शॉटपुट, सॉफ्ट बॉल थ्रो, बैडमिंटन, फुटबॉल, दौड़कर लंबी कूद और खड़े होकर लंबी कूद सहित विभिन्न खेल मुकाबले करवाए गए। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ भाग लेते हुए अपनी खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
अरशदीप कौर, रणजोधबीर सिंह और सुमनजीत कौर ने किया शानदार प्रदर्शन
प्रतियोगिता में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गंडीविंड की सुनने में असमर्थ छात्रा अरशदीप कौर, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पधरी कलां के दृष्टिबाधित छात्र रणजोधबीर सिंह और सरकारी मिडिल स्कूल, बिहारीपुर की दृष्टिबाधित छात्रा सुमनजीत कौर ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।
इनमें सुमनजीत कौर ने अपने सभी मुकाबलों में पहला स्थान हासिल कर विशेष उपलब्धि दर्ज की। विद्यार्थियों की इस सफलता से स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग में खुशी का माहौल रहा।
68 से अधिक स्थान हासिल कर जिले का नाम रोशन किया
जिले के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिताओं में कुल 68 से अधिक स्थान हासिल किए। यह उपलब्धि उनकी मेहनत, लगन और खेलों के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया कि उचित अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी भी विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
हर बच्चे में होती है विशेष प्रतिभा: राजिंदर कौर
इस अवसर पर उप जिला शिक्षा अधिकारी राजिंदर कौर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। जरूरत है उस प्रतिभा को पहचानने और उसे आगे बढ़ने का अवसर देने की।
उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को जीवन के हर चरण में आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग कर सकें।

