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Sukhbir Badal की संगत से अपील- छोटे साहिबजादों के शहादत दिवस को ‘साहिबजादे शहादत दिवस’ ​​के रूप में मनाएं

चंडीगढ़: आज पूरे देश में श्री गुरु गोबिंद सिंह के पुत्र बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी का शहादत दिवस मनाया जा रहा है। इस बीच अकाल दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने सिख समुदाय से एक अपील की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि पूरे सिख समुदाय से मेरा अनुरोध है कि केंद्र सरकार के कदम से अवगत होते हुए साहिबजादों के शहादत दिवस को “साहिबजादे शहादत दिवस” ​​के रूप में मनाएं।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हरजिन्द्र सिंह धामी ने भी संगत से की थी अपील

वहीं, इससे पहले एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने संगत से अपील की कि वह केंद्र सरकार द्वारा आयोजित वीर बाल दिवस समारोह को खारिज करें। धामी ने कहा कि केंद्र सरकार सिख इतिहास को नष्ट कर रही है, संगत इससे जागरूक रहे। भारत सरकार सिखों के इतिहास को भ्रमित करने की राह पर है। यह खेद का विषय है और दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका सरकार का सहयोग कर रहे हैं।

धामी ने कहा कि सिख समुदाय की परंपराओं के खिलाफ जाकर भारत सरकार द्वारा साहिबजादा के शहादत दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाना दुनिया के धार्मिक इतिहास की सबसे बड़ी शहादत और बहुमूल्य विरासत को नष्ट करने की साजिश है। एडवोकेट धामी ने कहा कि अगर सरकार वाकई साहिबजादों को श्रद्धांजलि और सम्मान देना चाहती है तो इस दिन को ‘साहिबजादे शहीदी दिवस’ के रूप में मनाने में क्या दिक्कत है? एडवोकेट धामी ने हरमीत सिंह कालका पर निशाना साधते हुए कहा कि भले ही वीर बाल दिवस का नाम कौम को स्वीकार नहीं लेकिन कालका केंद्र सरकार के सूत्रधार बने हैं।

उन्होंने कालका से पूछा कि क्या उनकी यह हरकत श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को मानने से इनकार नहीं है? एडवोकेट धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश पर सिख विद्वानों की कमेटी ने वीर बाल दिवस की जगह साहिबजादे शहादत दिवस नाम सुझाया है। इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी और संस्कृति मंत्रालय को शिरोमणि समिति द्वारा अवगत करा दिया गया है। केंद्र सरकार को पत्र भी भेज दिया गया है लेकिन फिर भी सरकार ने नाम नहीं बदला।

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