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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के सरकारी कॉलेजों में 1,158 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती को किया रद्द

नई दिल्ली: पंजाब सरकार को बड़ा झटका देते हुए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य भर के सरकारी कॉलेजों में 1,158 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। 2021 में शुरू हुई यह भर्ती प्रक्रिया शुरू से ही कानूनी चुनौतियों और विवादों में घिरी रही थी। पंजाब सरकार ने 2021 में सहायक प्रोफेसरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था।

हालाँकि, इस प्रक्रिया की आलोचना इस नियम के कारण हुई कि पाँच अतिरिक्त अंक केवल सरकारी कॉलेजों में कार्यरत अंशकालिक, अतिथि प्राध्यापक और संविदा कर्मचारियों को ही दिए जाएँगे। सरकारी सहायता प्राप्त या निजी कॉलेजों में कार्यरत प्राध्यापकों को इस लाभ से बाहर रखा गया था।

इस नियम को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कई याचिकाकर्ताओं द्वारा चुनौती दी गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि ये मानदंड भेदभावपूर्ण और अनुचित हैं।

2022 में, उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने निष्पक्षता और समानता के उल्लंघन का हवाला देते हुए भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। हालाँकि, उसी न्यायालय की एक खंडपीठ ने उस फैसले को पलटते हुए भर्ती प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी।

इसके बाद, कई याचिकाकर्ताओं ने इस मामले पर अंतिम निर्णय की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपील की।

आज अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को पलट दिया और 1,158 सहायक प्रोफेसरों की पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि भर्ती नियम वास्तव में भेदभावपूर्ण थे और चयन प्रक्रिया निष्पक्षता और समान अवसर के सिद्धांतों को बनाए रखने में विफल रही।

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