पटियाला : सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश का विस्तृत लिखित फैसला अभी सामने नहीं आने का असर अब पटियाला नगर निगम के कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है। कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक निगम ने जनरल हाऊस और वित्त एवं ठेका समिति (एफएंडसीसी) की बैठकें टाल दी हैं। इसका सीधा असर उन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर पड़ा है, जिन पर निगम सदन में फैसला होना था। सबसे बड़ा झटका करीब 550 सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण के प्रस्ताव को लगा है।
इसके साथ ही करीब 92 आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों को सीधे निगम के अधीन ठेके पर लेने का प्रस्ताव भी फिलहाल अटक गया है। यानी जिन कर्मचारियों को उम्मीद थी कि निगम की बैठक में उनके भविष्य को लेकर कोई फैसला हो सकता है, उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार करना पड़ेगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला दिसंबर 2024 में पटियाला, बाघापुराना और धर्मकोट में हुए नगरपालिका चुनावों के दौरान कथित हिंसा और नामांकन प्रक्रिया में अनियमितताओं से संबंधित है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोका गया, नामांकन दस्तावेज छीने और फाड़े गए तथा उनके साथ मारपीट की गई। नामांकन प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंगनहीं होने का आरोप भी लगाया गया था। मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में तथ्य-जांच आयोग गठित किया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी।
28 सितंबर को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने रिपोर्ट स्वीकार करने पर सहमति जताई और सुप्रीम कोर्ट ने भी रिपोर्ट स्वीकार कर ली। अदालत की कार्यवाही से यह संकेत मिला कि जिन वार्डों में आयोग ने हिंसा की पुष्टि की है, वहां दोबारा चुनाव कराने होंगे। पंजाब सरकार ने ऐसे वार्डों में 5 नवंबर को चुनाव कराने पर सहमति जताई है। लेकिन कौन-कौन से वार्ड इस दायरे में आएंगे और चुनाव का पूरा कार्यक्रम क्या होगा, इसका अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत लिखित आदेश के बाद ही सामने आएगा।
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