
Targets AAP and Congress Over Punjab Assembly Conduct : लुधियाना। भाजपा के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए विधानसभा में दोनों दलों के आचरण पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्यमंत्री भगवंत मान को सदन में प्रभावी ढंग से घेरने में विफल रही, जबकि पंजाब नशे, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। बिट्टू ने AAP से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर अपनी औपचारिक आपत्तियों और संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग भी की।
बिट्टू ने कहा, “कांग्रेस के नेता विधानसभा के बाहर मीडिया के सामने बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जब मुख्यमंत्री भगवंत मान को सदन के भीतर घेरने और जवाबदेह बनाने की बात आती है, तो वे पूरी तरह असहाय नजर आते हैं। यदि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष सरकार को वहीं जवाबदेह नहीं ठहरा सकते, जहां यह सबसे जरूरी है, तो फिर बाहर बड़े-बड़े बयान देने का क्या औचित्य है? पंजाब की जनता जानना चाहती है कि यह वास्तविक विपक्ष है या कोई सुविधाजनक राजनीतिक समझौता।” सत्र के समापन दिवस की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए बिट्टू ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर दिया गया।
कांग्रेस पंजाब के ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को प्रभावी ढंग से घेरने में विफल रही। उन्होंने विधायकों द्वारा अपने मुद्दे उठाने में आ रही कथित बाधाओं और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उनके हस्तक्षेपों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “पंजाब नशे की समस्या, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है, लेकिन भगवंत मान पंजाब के सवालों का जवाब देने के बजाय बिहार, पश्चिम बंगाल और हरियाणा की राजनीति पर चर्चा करने में अधिक रुचि लेते नजर आए। मुख्यमंत्री को दूसरे राज्यों की राजनीति की आड़ लेने के बजाय पंजाब की जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।”
SIR पर अपना रुख स्पष्ट करे आप बिट्टू ने आम आदमी पार्टी से स्पष्ट करने को कहा कि क्या पार्टी या उसके प्रतिनिधियों ने पंजाब में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर चुनाव आयोग या संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा, “यदि आप को SIR को लेकर वास्तव में कोई चिंता है, तो पार्टी बताए कि उसने चुनाव आयोग या संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष क्या आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पार्टी अपनी आपत्तियों और उनके समर्थन में मौजूद दस्तावेजों को सार्वजनिक करे। कैमरों के सामने आरोप लगाने का कोई महत्व नहीं है, जब तक कि तथ्यों को आधिकारिक रिकॉर्ड पर न रखा जाए।”
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