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स्कूलों में बच्चों से मारपीट और बुलिंग बर्दाश्त नहीं, सुरक्षा के लिए सख्त निर्देश

Tarn Taran Schools Told to Ensure Child Safety : अमृतसर। पंचकूला के स्कूल में छात्र की पिटाई का वीडियो सामने आने के बाद तरनतारन जिला बाल संरक्षण इकाई ने सख्ती दिखाई है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी राजेश कुमार ने जिले के सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बुलिंग रोकने और हिंसक घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस मामले पर जानकारी देते हुए राजेश कुमार ने कहा कि स्कूल ऐसे संस्थान हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण प्रदान करना है। बच्चों के साथ मारपीट, शारीरिक दंड, मानसिक उत्पीड़न, बदमाशी (बुलिंग), डराना-धमकाना या किसी भी तरह की हिंसा को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूल परिसर, कक्षाओं, खेल के मैदानों, गलियारों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में बच्चों की उचित निगरानी सुनिश्चित करें। हर स्कूल में एक ‘बाल सुरक्षा प्रभारी’ (चाइल्ड सेफ्टी इंचार्ज) या ‘नोडल अधिकारी’ नियुक्त किया जाना चाहिए और छात्रों को बदमाशी तथा हिंसक व्यवहार के बुरे प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यदि स्कूल के भीतर कोई हिंसक घटना होती है, तो पीड़ित बच्चे को तुरंत सुरक्षित किया जाना चाहिए और उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। घटना के बारे में माता-पिता को सूचित किया जाना चाहिए, मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर बच्चों को मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) भी दिया जाना चाहिए। राजेश कुमार ने कहा कि स्कूलों को बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनों और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए, जिनमें ‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (2015)’, ‘राइट टू एजुकेशन एक्ट (2009)’ की धारा 17, और ‘पोक्सो (POCSO) एक्ट (2012)’ शामिल हैं।

साथ ही, हर स्कूल में एक शिकायत पेटी (कंप्लेंट बॉक्स) और शिकायत दर्ज करने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए; इसके अलावा, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर (1098) को प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी स्कूल प्रमुखों को यह भी निर्देश दिया कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए की गई व्यवस्थाओं—जिसमें नियुक्त बाल सुरक्षा अधिकारी का विवरण भी शामिल है—की जानकारी एक हस्ताक्षरित अनुपालन रिपोर्ट (कंप्लायंस रिपोर्ट) के साथ ‘जिला बाल संरक्षण इकाई, तरनतारन’ को सौंपें। अंत में, यह स्पष्ट किया गया कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी घटना के मामले में लापरवाही, असावधानी या घटना को छिपाने की कोशिश को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा।

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