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253 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने पर मोगा में फूटा गुस्सा

Teachers Protest Against Termination of 253 Jobs in Punjab : मोगा। 4161 भर्ती के तहत नियुक्त शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए शिक्षक संगठनों ने DC कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन, फैसला वापस लेने की मांग; चेतावनी- मांगें नहीं मानीं तो तेज होगा आंदोलन।

पंजाब सरकार की ओर से 4161 भर्ती के तहत नियुक्त 253 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के फैसले के विरोध में शुक्रवार को शिक्षक संगठनों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय मोगा के समक्ष जोरदार रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार का पुतला फूंका और फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की। शिक्षक नेताओं ने मांग की कि 253 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई तुरंत रोकी जाए तथा उनकी नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शन के दौरान शिक्षक नेताओं बलजिंदर धालीवाल, दिग्विजय पाल शर्मा, प्रगटजीत सिंह किशनपुरा, गुरप्रीत सिंह अमीवाल और सुरिंदर शर्मा ने कहा कि 253 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का फैसला शिक्षक वर्ग के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के समान है।

उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों ने लंबी भर्ती प्रक्रिया से गुजरने के बाद अपनी सेवाएं शुरू की थीं, लेकिन अब उनकी नौकरी पर संकट खड़ा होने से शिक्षकों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि नौकरी किसी भी व्यक्ति के परिवार की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई से प्रभावित शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। सरकार को शिक्षकों को नौकरी से हटाने के बजाय उनकी सेवाओं को सुरक्षित रखने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका अहम शिक्षक नेताओं सुखपालजीत सिंह, जज्जपाल सिंह बाजेके, हरपिंदर ढिल्लों, प्रदीप रखड़ा और सुखमंदर निहाल सिंह वाला ने कहा कि पंजाब सरकार एक ओर शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का फैसला चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक किसी भी शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि शिक्षकों की नौकरी ही सुरक्षित नहीं होगी, तो इससे सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए शिक्षकों का मनोबल बढ़ाना चाहिए औ उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

शिक्षकों को नौकरी से हटाने के बजाय उनकी सेवाओं को जारी रखने के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। मांगें नहीं मानीं तो तेज होगा संघर्ष प्रदर्शनकारी शिक्षक संगठनों ने पंजाब सरकार से मांग की कि 253 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और उनकी नौकरी सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी। अंत में शिक्षक संगठनों ने प्रदेश के समस्त शिक्षक वर्ग से अपील की कि प्रभावित 253 शिक्षकों की सेवाएं बचाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष में बढ़-चढ़कर भाग लें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा का मुद्दा केवल संबंधित शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक वर्ग के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। इस मौके पर सुखविंदर घोलिया, दविंदर रौली, दीपू बुट्टर, कुलदीप सिंह, केवल सिंह, अमनदीप माछीके, स्वर्ण दास, सुखदेव कुमार, बिक्रमजीत सिंह, निर्मल सिंह चुंगवां, अमन मटवाणी, राजवंत घोलिया, नवदीप धूड़कोट, मोनू, नछत्तर धर्मकोट, नरेंद्र धर्मकोट और जगजीत धालीवाल सहित अन्य शिक्षक मौजूद थे।

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