अमृतसर: पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि हमारे शिक्षा पाठ्यक्र म में या स्कूलों के कालेजों के विविध कार्यक्रमों में शहीदों के जीवन, उनके बलिदान तथा उनके महान कार्यों के विषय में कोई जानकारी नहीं दी जाती।
इसी का यह दुष्परिणाम रहा कि हिंदुस्तान के पहले शहीद जिसने लंदन में जाकर कर्जन वायली को ठंडा किया, उसका नाम और काम अमृतसर वाले भी नहीं जानते थे और जो सरकारें अपने राजनीतिक लाभ के लिए जगह जगह कई स्मारक बनवाती हैं पर अमृतसर में मदनलाल ढींगरा का स्मारक बनवाने के लिए वर्षों संघर्ष करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि बलिदान दिवस पर शिक्षण संस्थाओं में भाषण प्रतियोगिता हो शहीदों के दिन मनाए जाएं। उन्होंने कहा कि अफसोस यह भी है कि पंजाब का लोक संपर्क विभाग अपने शहीदों के विषय में कोई भी साहित्य प्रकाशित नहीं करता। इसी का दुष्परिणाम है कि दुर्गा भाभी, भगवती चरण वोहरा, मदनलाल ढींगरा, बटुकेश्वर दत्त, चंद्रशेखर आजाद जैसे देश के महान क्र ांतिकारियों के जीवन को भी हमारे शिक्षा विभाग ने बच्चों तक नहीं पहुंचाया।
मेरी सरकार से अपील है कि इसके पश्चात कोई भी शहीदी दिन आए वह शिक्षण संस्थानों में मनाएं। सभी कार्यालयों में उनको श्रद्धांजलि दें और बच्चों की शहीदों के ज्ञान से सम्बद्ध परीक्षाएं भी ली जाएं। सवाल है कि स्कूल पाठ्यक्र म में इन शहीदों की गाथाएं क्यों न पढ़ाई जाएं।

