चंडीगढ़: SGPC सदस्य, वरिष्ठ अकाली नेता और मास्टर तारा सिंह की पोती, बीबी किरणजोत कौर ने पंजाब सरकार के राज्य के तीन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा देने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि सिखों के लिए तंबाकू और कुठा (हलाल) मांस बज्जर कुरेहित (प्रमुख धार्मिक पाबंदियां) माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि सिख धर्म में शराब और अन्य नशीले पदार्थ भी वर्जित हैं, लेकिन झटका मांस सिखों का सही तरीका है।
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उन्होंने आगे कहा कि अकाली दल ने 1935 में झटका मांस के समर्थन में एक “झटका सम्मेलन” आयोजित किया था। सिख इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं और सिखों के शिकार करने के कई किस्से हैं। उन्होंने गुरु नानक देव जी का एक किस्सा सुनाया, जिसमें कहा गया कि कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण के दौरान उन्होंने हिरण का मांस पकाया था।
बीबी किरणजोत कौर ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष से भी इस मुद्दे पर पंजाब सरकार के सामने औपचारिक रूप से आपत्ति उठाने की अपील की। उन्होंने सिख आचार संहिता पर लौटने का आग्रह किया, और जोर देकर कहा कि सिख परंपराओं पर डेरों से जुड़ी प्रथाओं का साया नहीं पड़ना चाहिए।
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याद दिला दें कि 24 नवंबर को आनंदपुर साहिब में पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में पारित एक प्रस्ताव में प्रस्तावित पवित्र शहरों में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध और मांस की दुकानों और रेस्तरां को बंद करने का जिक्र था, जिसके बाद से विभिन्न हलकों से बहस और आपत्तियां शुरू हो गई हैं।

