The one-month grace period has ended : अमृतसर। धार्मिक अपमान (बेअदबी) से जुड़े कानून के आपत्तिजनक प्रावधानों में जरूरी बदलाव करने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से पंजाब सरकार को दिया एक महीने का समय आज समाप्त हो गया है, लेकिन इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से दोबारा कोई बातचीत न होना शासकों के अहंकार और सिखों की भावनाओं के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाता है।
सरकार की चुप्पी पर जताई नाराज़गी
यह बात श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने मीरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान संगत को संबोधित करते हुए कही। ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने कहा कि सिख समुदाय के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की महानता, गुरु की गोलक और सिख धर्म के सिद्धांत सर्वोपरि हैं। सिख समुदाय ऐसे कानूनी प्रावधानों को कभी स्वीकार नहीं कर सकता जो इन पवित्र सिद्धांतों का अपमान करते हों। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब ने सरकार को आपत्तिजनक प्रावधानों में संशोधन करने के लिए एक महीने का समय दिया था, लेकिन इस मामले में सरकार की चुप्पी चिंताजनक है।
प्रावधानों में तत्काल संशोधन की मांग
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि सिख समुदाय उन “गुरु-द्रोही और खालसा पंथ-विरोधी” लोगों को कभी माफ नहीं करेगा जो गुरु की गोलक, सिख संस्थाओं और सिख धर्म के मूल सिद्धांतों को चुनौती देते हैं। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय हमेशा गुरु घर की गरिमा, सिद्धांतों और राष्ट्रीय संस्थाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है और भविष्य में भी हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए तैयार है। ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने पंजाब सरकार से आग्रह किया कि वह सिखों की भावनाओं का सम्मान करते हुए धार्मिक अपमान से जुड़े कानून के आपत्तिजनक प्रावधानों में तुरंत जरूरी संशोधन करे और श्री अकाल तख्त साहिब से संपर्क कर इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान करे।
धामी बोले— श्री अकाल तख्त सर्वोच्च
इससे पहले, ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने ‘मीरी-पीरी खालसा मार्च’ के पांचवें दिन संगत को संबोधित किया। यह मार्च गुरुद्वारा साहिब पातशाही पहली डेरा कार सेवा धर्मकोट (मोगा) से अगले पड़ाव, गुरुद्वारा तख्तूपुरा साहिब (मोगा) के लिए रवाना हो रहा था। इस बीच, SGPC के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च संस्था है, जो किसी सरकार या समय के प्रभाव में नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा और श्री अकाल तख्त साहिब के मार्गदर्शन में सिखों ने हमेशा अपने धार्मिक, सामाजिक और पंथिक फैसले लिए हैं। मुगल शासन से लेकर ब्रिटिश शासन और आज तक, सरकारों ने सिख संस्थाओं और परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश की है, लेकिन पंथ ने उन्हें कभी सफल नहीं होने दिया।

