अमृतसर Jathedar : सिख यूथ फेडरेशन और यूनाइटेड सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह को पत्र लिखकर गुरु नानक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह की शिकायत की थी, जिसमें फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई रणजीत सिंह दमदमी टकसाल और भाई जुगराज सिंह मङौल ने लिखा था कि गुरु नानक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जो आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ मिलकर सिख धर्म का हिंदूकरण करना चाहते हैं।
इसके बाद वाइस चांसलर डॉ. करमजीत सिंह की मोहन भागवत के साथ वीडियो देखने और उनके सिख विरोधी विचार सुनने के बाद, संगठनों से मिली शिकायतों और सिख संगत की भावनाओं को देखते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने डॉ. करमजीत सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार पद संबंधी नियम-कायदे बनाने के लिए बनाई गई कमेटी से तुरंत हटा दिया। फेडरेशन के अध्यक्ष भाई रणजीत सिंह दमदमी टकसाल ने शिरोमणि कमेटी का धन्यवाद किया है और श्री अकाल तख्त साहिब से डॉ. करमजीत सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और यह भी कहा है कि डॉ. करमजीत सिंह को तुरंत गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पद से हटाया जाए, अन्यथा सिख संगठन और संगत संघर्ष शुरू करने पर मजबूर हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि करमजीत सिंह को आरएसएस के एक कार्यक्रम में देखे जाने के कारण श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के सेवा नियम बनाने वाली कमेटी से हटा दिया गया था, तो साफ है कि अगर करमजीत सिंह का वीडियो सामने न आता तो यह आरएसएस एजेंट अभी भी उस कमेटी का सदस्य होता और सदस्य बनने के बाद क्या करता, यह सोचने वाली बात है। दूसरी बात यह है कि इस आरएसएस वाले को अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के सेवा नियम बनाने वाली कमेटी का सदस्य किसने बनाया और अब बाकी सदस्यों के बारे में भी पूरी जांच होनी चाहिए, जैसे करमजीत सिंह को सदस्य बनाते समय कोई जांच नहीं हुई, वैसे ही बाकी सदस्यों के बारे में क्या किया गया है। उस कमेटी में करमजीत जैसे और कितने लोग होंगे, कौन जाने। इसके अलावा सिख कौम से जुड़ी कमेटियों और संस्थाओं में पता नहीं कितने करमजीत बैठे होंगे। इसलिए सिख नौजवानों को मैदान में आकर इन गद्दारों, कैटा और पंथ दोखियों से सिख कौम को बचाने का फर्ज निभाना चाहिए।

