बठिंडा: नगर निगम बठिंडा में फरवरी माह में मेयर पद के चुनाव से शुरू हुई उठापटक अभी भी जारी है। पहले डिप्टी मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया तो एफएंडसीसी टीम के साथ सभी कमेटियां भंग कर दी गई। वही हाल में नई एफएंडसीसी के गठन के बाद नए डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर कयास तेज हुए लेकिन इसे पैंडिंग रखा गया था। वहीं अब सीनियर डिप्टी मेयर अशोक कुमार के खिलाफ नवनियुक्त मेयर पदमजीत मेहता समर्थित पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव रख दिया है। इस संबंध में करीब 8 पार्षदों ने कमिश्नर से मिलकर उन्हें अविश्वास प्रस्ताव संबंधी पत्र सौंपा है। इस तरह अब इसी सप्ताह नगर निगम की जरनल हाऊस बैठक होने की उम्मीद भी बन रही है।
इसी बैठक में जहां अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी, वही प्रस्ताव पारित होने की सूरत में खाली पड़े डिप्टी मेयर के साथ सीनियर डिप्टी मेयर का चुनाव भी संभव है। हालांकि इसे लेकर लोकल बॉडी डिपार्टमेंट के पत्र का इंतजार करने की बात भी हो रही है लेकिन वैधानिक तौर पर इस तरह के मामले में सरकार व विभाग की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है। बताते चले कि जनवरी 2025 में नगर निगम में पंजाब क्रिक्रेट एसोसिएशन के प्रधान अमरजीत मेहता ने अपने सुपुत्र व नए पार्षद बने पदमजीत सिंह मेहता को मेयर बनाने के लिए लामबंदी शुरू की थी। यह पहला मामला था जिसमें आम आदमी पार्टी की तरफ से जिस पार्षद को मेयर का दावेदार बनाया गया, उनके पास अपने ही पार्टी के विधायक व उनके संमर्थित पार्षदों का समर्थन नहीं था लेकिन जब फरवरी में मेयर पद के चुनाव हुए तो सभी कयास व आंकड़े एक तरफ रह गए व सदन के 35 पार्षदों ने उनके समर्थन में वोटिंग कर पदमजीत सिंह मेहता को मेयर बना दिया।
एकाएक मिले समर्थन से उत्साहित नए मेयर पदमजीत मेहता ने अपने स्तर पर नगर निगम में अपने समर्थित पार्षदों को एडजस्ट करने के लिए योजना बनाने के साथ दांव खेलना शुरू किया। इसमें पहला दांव उस समय के डिप्टी मेयर मास्टर हरमंदर सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रख दिया, हालांकि इस प्रस्ताव में बहस के लिए रखी बैठक को अंतिम समय में रद्द कर दिया गया लेकिन कुछ दिनों बाद मास्टर हरमंदर सिंह ने स्वयं ही त्यागपत्र दे दिया। वहीं अब मार्च में दूसरा दांव एफएंडसीसी मैंबर्स को लेकर चला, जिसमें जरनल हाऊस बैठक में सेप्लीमेंटरी एजेंडा में ही नई फाइनेंस कमेटी गठित कर दी गई।
इसमें लोगों को उस समय हैरानी हुई, जब सत्तारुढ़ आप ने कांग्रेस समर्थित एक महिला पार्षद को कमेटी का मैंबर नियुक्त कर दिया। इस सबके बीच जहां पुरानी कांग्रेस वजारत के लोगों को हटाने का काम हो रहा था, वही कांग्रेस के सबसे नजदीकी अशोक कुमार को सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर बरकरार रखा गया। इस बीच मेयर का समर्थन करने वाले पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ग्रुप का लगातार दबाव था कि उन्हें पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए। वहीं मेयर के नजदीकी अशोक कुमार को हटाने की बजाय उन्हें स्वयं इस्तीफा देने के लिए राजी करने की कोशिश करते रहे लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।
इस बीच पिछले लंबे समय से सोशल मीडिया में मनप्रीत बादल के रिश्तेदार जयजीत सिंह जोजो की तरफ से जारी एक वीडियो जिसमें अशोक कुमार के एक परिजन को विजिलेंस से बचाने के लिए पूर्व सरकार में किए प्रयासों को लेकर चर्चा होती रही है तो लेकर दबाव बनाने की कोशिश भी की गई, लेकिन सभी प्रयास फेल हो गए तो अब पार्षदों ने मिलकर सीनियर डिप्टी मेयर को वोटिंग के आधार पर हटाने का फैसला लिया है। इसे लेकर कमिश्नर को सौंपे पत्र के बाद अभी किसी तरह का अंतिम फैसला नहीं लिया गया है लेकिन इस बाबत अब कमिश्नर आने वाले शुक्रवार तक जरनल हाऊस बैठक बुलाने के लिए कह सकते हैं।
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