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भक्ति और आस्था से गूंजा पाठशाला मंदिर, जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन

The school-temple resonated with faith : मोगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्री जन्माष्टमी को लेकर मोगा के प्राचीन पाठशाला मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है। मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जहां पिछले सात दिनों से लगातार धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है।

सुबह पूजन, जबकि शाम को कथा और कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो रहे हैं। करीब 100 वर्षों से मनाए जा रहे इस उत्सव में श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना के साथ धार्मिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं। मंदिर के पुजारी पवन गौतम ने श्रद्धालुओं से प्रमाणिक धार्मिक ज्ञान अपनाने, बच्चों को संस्कार देने और धर्म के नाम पर विभाजन के बजाय आपसी प्रेम, सम्मान व भाईचारा मजबूत करने की अपील की। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति कर रहे हैं। सुबह दो शिफ्टों में पूजन करवाया जा रहा है, जबकि शाम के समय करीब साढ़े तीन घंटे कथा एवं कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

पाठशाला मंदिर के पुजारी पवन गौतम ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए बताया कि पाठशाला मंदिर मोगा शहर का प्राचीन एवं महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। मोगा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में करीब 100 वर्षों से जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा एवं धूमधाम से मनाया जा रहा है। पिछले करीब 25 वर्षों के दौरान इस उत्सव का और विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-शांति और खुशहाली के लिए श्रीमद्भागवत महापुराण के पाठ करवाते हैं। इसके अलावा मंदिर में डांडिया नृत्य और झूला उत्सव भी आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से भाग लिया।

आने वाले दिनों में भी विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुजारी पवन गौतम ने कहा कि आज कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों के लिए धर्म के नाम पर समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। एक-दूसरे के धार्मिक विश्वासों की निंदा या अपमानजनक भाषा का प्रयोग समाज में दूरी पैदा कर सकता है। इसलिए सभी को आपसी सम्मान, सहनशीलता और भाईचारे को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के माध्यम से इन दिनों अधूरा अथवा गलत धार्मिक ज्ञान बड़ी मात्रा में फैलाया जा रहा है। कई बार ऐसी बातों का धार्मिक ग्रंथों या प्रमाणिक पुस्तकों में कोई आधार नहीं होता, लेकिन भगवान की तस्वीर के साथ साझा किए जाने के कारण लोग उन्हें सच मान लेते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी धार्मिक जानकारी को स्वीकार करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करें और धार्मिक ग्रंथों का स्वयं अध्ययन करें।

पवन गौतम ने कहा कि गलत जानकारी के प्रभाव में आकर हम न केवल अपने भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि बच्चों को भी गलत दिशा में ले जा सकते हैं। धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी संस्कृति, संस्कारों और अच्छी जीवन-मूल्यों से जुड़े रहना भी धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान श्रीकृष्ण के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहां ज्ञान और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता हो, वहां प्रमाणिक ज्ञान का सहारा लेना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपने साथ-साथ समाज के प्रति भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर चीज की एक सीमा होती है, इसलिए हमें संयम, सहनशीलता और विवेक से काम लेना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक मामलों में अधूरी जानकारी पर विश्वास करने के बजाय प्रमाणिक धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें, सोशल मीडिया पर प्राप्त जानकारी की पुष्टि करें तथा आपसी सम्मान और सामाजिक एकता को मजबूत करने के प्रयास करें।

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