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तिरंगे और शहीद पिता की वर्दी को माथे से लगाकर रो पड़ा बेटा, नम आंखों से दी विदाई

मुलाना: भारत मां के वीर सपूत शहीद सूबेदार धर्मबीर सिंह को अंतिम विदाई के समय शुक्रवार सुबह पूरा साबांपुर गांव भारत माता की जय और धर्मबीर सिंह अमर रहे के जयकारों से गुंज उठा । शहीद धर्मबीर की अंतिम विदाई में सभी ग्रामीणों सहित स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे तिरंगा लेकर शामिल हुए। भारतीय सेना के उच्च अधिकारियों द्वारा धर्मबीर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई और उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। इस दौरान भारतीय सेना के जवानों ने सलामी दी। इस दौरान शहीद धर्मबीर सिंह की पत्नी अनिता का रो रो कर बुरा हाल था। वो बार बार बेहोश हो रही थी। सभी के लिए यह पल गर्व और भावुकता पूर्ण रहे।

पोते को नौकरी की मांग
शहीद धर्मबीर सिंह की माता जवंतरी देवी ने सेना के उच्च अधिकारियों से अपने पोते विवेक के लिए नौकरी की मांग की। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया। उसने लैड स्लाइड में लोगों को बचाया। अब मेरे पोते को नौकरी दे दो । मुङो और कुछ नहीं चाहिए। साथ ही गांव में शहीद धर्मबीर सिंह के नाम पर एक पार्क की मांग भी की गई।

पिता की वर्दी को माथे से लगा रो पड़ा विवेक
शहीद धर्मबीर के बेटे विवेक को भारतीय सेना के अधिकारियों ने शहीद धर्मबीर सिंह की वर्दी सौंपी । जिसको लेकर विवेक ने माथे से लगा लिया और भावुक हो गए । विवेक ने बताया कि मेरे पिता देश का रक्षा में शहीद हुए है। मुङो उनपर गर्व है और मैं भी भारतीय सेना में भर्ती होने का प्रयास करूंगा ताकि देश की सेवा कर सकूं।

नहीं मिला पार्थिव शरीर, सेना सम्मान के साथ अंतिम विदाई
45 वर्षीय शहीद धर्मबीर सिंह देश की सेवा करते हुए सिक्किम के लाचेन में 1 जून 2025 को भारी बारिश से लैंडस्लाइड हादसे के दौरान लापता हुए थे। तब से भारतीय सेना ने उन्हें ढूंढने का भरसक प्रयास किया लेकिन धर्मबीर सिंह का पार्थिव शरीर नहीं मिल पाया । परिजन तभी से ही हर रोज रो रहे है। परिजनों को अभी भी आस थी ,उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन हो। लेकिन कुछ दिन पहले भारतीय सेना के जवानों ने घर आकर उन्हें उनके शरीर न मिलने की अधिकारिक पुष्टि की । जिसके बाद शुक्रवार को शहीद धर्मबीर सिंह सेना सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई । अंतिम विदाई के दौरान सेना ने परिजनों को भारतीय तिरंगा और शहीद धर्मबीर सिंह की वर्दी परिजनों को सौंपी ।

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