Last Updated: October 15, 2026

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मिशन सारथी से नशे पर वार, 43 स्कूलों के प्रिंसिपल और काउंसलर प्रशिक्षित

October 15, 2026

मिशन सारथी से नशे पर वार, 43 स्कूलों के प्रिंसिपल और काउंसलर प्रशिक्षित

Trains School Leaders to Combat Drug Abuse : मोगा। युवाओं को नशे से बचाने और विद्यार्थियों को सही दिशा देने के लिए जिला प्रशासन ने मिशन सारथी के तहत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में 43 सरकारी और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों तथा गाइडेंस काउंसलरों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों में नशे के शुरुआती संकेत पहचानने, व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देने और समय रहते काउंसलिंग व उपचार उपलब्ध करवाने के तरीके बताए। डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने और जोखिमग्रस्त बच्चों को उचित मार्गदर्शन देने की अपील की। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाने, जोखिमग्रस्त विद्यार्थियों की समय रहते पहचान करने और उन्हें उचित मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित करना था। इसमें जिले के 43 सरकारी और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों तथा गाइडेंस काउंसलरों ने भाग लिया। जिला प्रशासन ने नशे के खिलाफ अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए मोगा जिले के 20 क्षेत्रों को विशेष ध्यान देने के लिए चुना है।

मिशन सारथी का उद्देश्य स्कूलों में करियर काउंसलिंग, विद्यार्थियों के उचित मार्गदर्शन, नशे के प्रति जागरूकता और जरूरत पड़ने पर समय रहते विशेषज्ञों की सहायता उपलब्ध करवाने की व्यवस्था को मजबूत करना है। विशेषज्ञों ने बताए नशे के शुरुआती संकेत प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक्ट ह्यूमन के निदेशक दीप कालड़ा, डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. गौरवप्रीत सिंह, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं मनोचिकित्सक डॉ. चरणप्रीत सिंह, ग्लोबल चाइल्ड वेलनेस इंस्टीट्यूट (जीसीडब्ल्यूआई), लुधियाना के निदेशक डॉ. रविश अरोड़ा तथा जीसीडब्ल्यूआई मोगा के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक एवं सेंटर हेड सचिन कुमार ने विशेषज्ञ सत्रों के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

विशेषज्ञों ने किशोरावस्था के विद्यार्थियों में नशे के सेवन से जुड़े संभावित संकेतों, व्यवहार में बदलाव, जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा साथियों के दबाव से निपटने, वास्तविक मामलों के अध्ययन तथा जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को विशेषज्ञ उपचार और पुनर्वास सेवाओं के लिए रेफर करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। शिक्षक बनें विद्यार्थियों के सच्चे सारथी: डिप्टी कमिश्नर इस अवसर पर डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया, आईएएस ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्कूलों में बच्चों के साथ रोजाना संपर्क रहने के कारण शिक्षक उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों और किसी संभावित समस्या के शुरुआती संकेतों को पहचानने में मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करें और उन्हें ऐसा वातावरण दें, जिसमें बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। समय पर मार्गदर्शन, संवेदनशील काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों की सहायता से युवाओं को नशे से दूर रखने के प्रयास अधिक प्रभावी बनाए जा सकते हैं। स्कूलों में मजबूत की जाएगी।

काउंसलिंग व्यवस्था एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) जसपिंदर सिंह, आईएएस ने स्कूल प्रिंसिपलों और गाइडेंस काउंसलरों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने स्कूलों में ऐसी व्यवस्था विकसित करें, जिससे जोखिमग्रस्त विद्यार्थियों की शुरुआती स्तर पर पहचान की जा सके। उन्होंने अभिभावकों को इस प्रक्रिया में शामिल करने, बच्चों की काउंसलिंग संवेदनशीलता के साथ करने और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विशेषज्ञों की सहायता लेने पर जोर दिया। जिला प्रशासन ने कहा कि मिशन सारथी के माध्यम से शिक्षकों को जागरूक और प्रशिक्षित कर स्कूलों को नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा, ताकि युवाओं को सही दिशा देकर उनके सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा सकें।

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