पंजाब डेस्क: जालंधर के मशहूर बॉडी बिल्डर वरिंद्र सिंह घुम्मन की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। परिवार ने दावा किया है कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही को मौत की वजह बताया गया है। घुम्मन के भाई रब्बी ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद अब परिवार कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है और जल्द ही अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ केस दायर किया जाएगा।
सर्जरी के दौरान हुई थी मौत
घुम्मन का 9 अक्टूबर 2025 को अमृतसर स्थित निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान निधन हो गया था। परिवार का आरोप है कि सर्जरी से पहले वह पूरी तरह फिट थे और नियमित व्यायाम कर रहे थे। परिजनों ने यह भी दावा किया था कि शव पर असामान्य निशान थे सिर से कंधे तक शरीर का रंग काला और नीला पड़ा हुआ था जिससे उन्हें लापरवाही का संदेह हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब सरकार ने जांच के लिए अमृतसर सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों की अगुवाई में SIT गठित की थी। मेडिकल पहलुओं की पड़ताल के बाद रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी गई है। हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, परिवार का कहना है कि इसमें स्पष्ट रूप से मेडिकल नेग्लिजेंस की पुष्टि की गई है।
“पहले दिन से उठाए सवाल सही साबित हुए”
रब्बी ने कहा, “हमें भरोसा था कि जांच निष्पक्ष होगी। हमने शुरू से जो आरोप लगाए थे, वे सही साबित हुए हैं। अब हम कानूनी प्रक्रिया के तहत न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।” उन्होंने जांच टीम और सरकार का धन्यवाद भी किया।
खेल जगत में अलग पहचान
6 फुट 2 इंच लंबे वरिंदर सिंह घुम्मन को एशिया के इकलौते शाकाहारी प्रोफेशनल बॉडी बिल्डर के रूप में जाना जाता था। उन्होंने 2005 में मिस्टर जालंधर और मिस्टर पंजाब का खिताब जीता। इसके बाद 2009 में मिस्टर इंडिया बने और अगले वर्ष मिस्टर एशिया प्रतियोगिता में उपविजेता रहे।
घुम्मन का परिवार भी खेल पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है उनके दादा हॉकी खिलाड़ी और पिता कबड्डी से जुड़े रहे। स्कूल के दिनों में वह क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज भी रहे थे।
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फिल्मों और सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय
बॉडी बिल्डिंग के अलावा उन्होंने फिल्मों में भी काम किया। वह Kabaddi Once Again (2012), Roar: Tigers of the Sundarbans (2014), Marjaavaan (2019) और Tiger 3 (2023) में नजर आए। हाल ही में उन्होंने 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान भी किया था। सोशल मीडिया पर उन्होंने समर्थकों से राय मांगी थी कि वे किसी राजनीतिक दल से चुनाव लड़ें या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में। उनका कहना था कि खेलों को बढ़ावा देकर युवाओं को नशे से दूर रखा जा सकता है।

